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शिव की आराधना को उमड़े भक्त

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सावनी सोमवार को कालिंजर दुर्ग के नीलकंठेश्वर मंदिर में श्रद्धालु। - फोटो : BANDA
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बांदा/बबेरू। नाग पंचमी पर परंपरा के साथ मनाया गया। सावन के तीसरे सोमवार ने इस दिवस को और महत्वपूर्ण बना दिया। शिवालयों में हर-हर महादेव गूंजता रहा। उधर, गलियों में सपेरों की बीन गूंजती रही।
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तड़के से ही शहर और जनपद के शिवालय भक्तों की भीड़ से भरपूर हो गए। सबसे ज्यादा श्रद्धालु मंडल मुख्यालय के बांबेश्वर पहाड़ में स्थित शिव मंदिर में उमड़े। गुफा में स्थित शिवलिंग में दुग्धाभिषेक और जलाभिषेक व पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं को लंबी लाइन में लगकर देर तक इंतजार करना पड़ा।
पुलिस और मंदिर कार्यकर्ताओं ने महिला-पुरुषों के लिए अलग-अलग व्यवस्था की थी। मंदिर के बाहर कई संगठनों व श्रद्धालुओं ने प्रसाद वितरण किया। मेला जैसा नजारा भी रहा। उधर, नाग पंचमी के उपलक्ष्य में घर के दरवाजे दीवारों पर गोबर से नाग की आकृतियां बनाई गईं। नागदेवता की पूजा-अर्चना हुई। सपेरे सड़कों और गलियों पर घूमते और सर्प दर्शन कराते रहे।
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बबेरू के मढ़ीदाई मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। मंदिर समिति द्वारा पूरे सावन मास नियमित शंकर प्रतिमा स्थापित कर पूजन-अर्चन किया जाता है। रुद्राभिषेक 16 अगस्त तक चलेगा। कार्यक्रम संयोजक अरविंद कुमार कसौंधन, संजय, रमेश अग्निहोत्री, सुनील शुक्ल, गुलाब चंद्र उपाध्याय, राजू यादव, सतीश मिश्रा, राजा मिश्रा, पूर्वा अवस्थी, पंकज शर्मा, मुन्ना, डा. सत्यनारायण गुप्ता, भोला गुप्ता, आनंद यादव, प्रताप नारायण चौबे आदि मौजूद रहे। उधर, आम चौराहे पर स्थित अद्भुत शिव मंदिर में देरशाम तक शिवभक्तों का तांता रहा। नागेश्वर बाबा स्थान पर कन्या भोज हुआ।
कालिंजर के ऐतिहासिक दुर्ग पर स्थित नीलकंठेश्वर मंदिर में सीमावर्ती मध्य प्रदेश सहित आसपास के गांवों से बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। प्रशासन की उपेक्षा से श्रद्धालुओं को पीने के पानी से लेकर अन्य अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ा। इसे लेकर श्रद्धालुओं में काफी रोष देखा गया। शिव सेवा समिति के सोनू सिंह गौरव, सत्येंद्र सिंह, आशीष सिंह, दीपक चौरसिया, रामभरोसे चौरसिया, शीलू राज सहित अतुल सुल्लेरे आदि ने कहा कि सावन में भी पानी के लाले प्रशासन के लिए शर्म की बात है।
तिंदवारी कस्बे समेत आसपास के गांव बेंदा, जौहरपुर, छापर, मूंगुस, भुजौली, सैमरी, पपरेंदा में नाग पंचमी और सावनी सोमवार को लेकर खास उत्साह रहा। श्रद्धालुओं ने परंपरा के मुताबिक मंदिरों में नागदेवता के लिए दूध रखा। शिवालयों में पूजा अर्चना हुई। कई गांवों में कुश्ती के आयोजन हुए।
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