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चित्रकूट अस्पताल में दो महिला चिकित्सकों की तैनाती

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फोटो-3- जिला अस्पताल के जच्चा बच्चा वार्ड में विशेषज्ञ डाक्टर के न होने परेशान बैठे प्रसव दर्द होन? - फोटो : CHITRAKOOT
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बांदा। चित्रकूट के संयुक्त चिकित्सालय में दो स्त्री रोग विशेषज्ञों की नियुक्ति कर दी है। ये दोनों डॉक्टर चित्रकूट के सामुदायिक केंद्रों में तैनात हैं। अपर निदेशक (चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) डॉ. नरेश सिंह तोमर ने चित्रकूट के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को इस बाबत 21 अप्रैल को पत्र जारी कर दिया है। यहां महिला रोग विशेषज्ञ के अभाव में 15 अप्रैल को प्रसूता रोशनी मिश्रा की मौत हो गई थी। लगातार हो रही फजीहत के बाद विभागीय अफसर अब जागे हैं।
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अपर निदेशक की ओर से जारी आदेश में कहा है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मऊ में तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मोनिका गुप्ता और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मानिकपुर में तैनात डॉ. स्वाती पाठक से जिला अस्पताल में भी कार्य लिया जाए। दोनों की ड्यूटी इस प्रकार लगाई जाए कि मऊ और मानिकपुर स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन में भी रुकावट न आए। इन दोनों महिला डॉक्टरों की तैनाती के लिए चित्रकूट के सीएमओ और जिला अस्पताल के सीएमएस ने अपर निदेशक को पत्र भेजकर अनुमति मांगी थी। पत्र में कहा गया था कि शासन से तैनाती होने तक उपरोक्त महिला चिकित्सकों को जिला अस्पताल में तैनात किया जाए।
डॉ. रफीक के निलंबन की संस्तुति
बांदा। प्रसूता रोशनी मिश्रा की मौत के मामले में अस्पताल के स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रफीक अंसारी जांच रिपोर्ट आए बिना कार्रवाई के घेरे में आ गए हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश कुमार खरे ने प्रथम दृष्टया उनकी लापरवाही मानी है। उन्होंने उनके निलंबन और अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति शासन से की है। दो पन्ने के पत्र में कहा है कि डॉ. रफीक अंसारी ने फोन नहीं उठाया। उनके आवास पर वाहन चालक को भेजा गया तो दरवाजा नहीं खोला। डॉ. अंसारी पहले भी नर्सों के कॉल करने पर नहीं आते थे। इसके अलावा ड्यूटी में विलंब से आने पर डॉ. रफीक से कई बार स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन उनके कार्य एवं व्यवहार में कोई सुधार नहीं हुआ। (संवाद)
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खतरा से आगाह कर रेफर कर दिया था
सीएमएस की ओर से शासन को भेजे पत्र में यह भी कहा गया है कि प्रसूता रोशनी मिश्रा को भर्ती करने के बाद तीमारदारों को उसकी गंभीर हालत और खतरे के बारे में अवगत करा दिया गया था। जांच रिपोर्ट में प्रसव की तिथि 13 मई संभावित थी। ईएमओ डॉ. संतोष कुमार ने उसी समय प्रसूता को किसी उच्च संस्थान के लिए रेफर कर दिया था।
एक साल पहले की बताई संभावित प्रसव तिथि
सीएमएस की ओर से शासन में सचिव को भेजे पत्र में प्रसूता रोशनी मिश्रा के प्रसव के बारे में एक वर्ष पूर्व की तिथि दर्ज की है। पत्र के पहले पैरे में ही लिखा गया है कि प्रसूता की जांच रिपोर्टों के अनुसार प्रसव का दिनांक 13 मई 2021 संभावित है। यानी एक वर्ष पूर्व (2021) प्रसव को संभावित दर्शाया गया है, जबकि 13 मई 2022 होनी चाहिए थी। सीएमएस ने शायद लिपिक द्वारा टाइप किए गए पत्र पर आंख मूंदकर हस्ताक्षर कर दिए।
आखिर कितनी लंबी चलेगी जांच, लीपापोती की तैयारी तो नहीं
चित्रकूट। जिला अस्पताल में बिना डॉक्टर की मौजूदगी के हुए प्रसव के बाद प्रसूता की मौत के मामले की जांच छह दिन बाद भी पूरी नहीं हो पाई। पीड़ित परिवार का आरोप है कि लीपापोती करके प्रकरण के दोषियों को बचाने की कवायद चल रही है। सीएमओ डा. भूपेश द्विवेदी का कहना है कि जांच तो सभी के बयान के बाद ही पूरी होगी। आरोपी डॉ. रफीक दस दिन के अवकाश पर हैं। अन्य कई स्टाफ कभी मिलता है कभी नहीं मिलता। (संवाद)
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