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भैया दूज का पर्व मनाया गया

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बांदा। भैया दूज का पर्व शनिवार को आस्था और परंपरा व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। बहनों ने भाइयों का तिलक किया और उनकी लंबी उम्र, सुखी जीवन की कामना की। मान्यता है कि इस दिन मृत्यु के देवता यम अपनी बहन यमुना के बुलावे पर उनके घर भोजन के लिए गए थे। तभी से इस पर्व की परंपरा पड़ी।
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पिछले चार दिनों से चल रहे त्योहारी माहौल में अंतिम दिन भैया दूज की धूम रही। दूर-दूर से बहन या भाई एक-दूसरे के पास पहुंचे। पूजा की थाली में रोली, फल-फूल, सुपारी, चंदन और मिठाई सजाई। चावल के मिश्रण से टीका तैयार किया।
भाई को चौक पर बैठाकर निर्धारित शुभ मुहूर्त में बहनों ने तिलक लगाया। उन्हें गोला, पान, बतासे, फूल, काले चने इत्यादि दिए और मुंह मीठा कराया। भाइयों की आरती उतारी। भाइयों ने भी मिठाई खिलाई और तोहफे दिए। भाई-बहन के बीच प्रेम परवान चढने का यह पर्व मात्र 2 घंटे 11 मिनट रहा। दोपहर 1.10 से अपराह्न 3.21 तक भाई दूज का मुहूर्त था।
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दिवाली के दूसरे दिन शुक्रवार को घर-घर गोवर्धन पूजा हुई। यह कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाई जाती है। मूलरूप से यह प्रकृति की पूजा है। इसकी शुरूआत श्रीकृष्ण ने की थी। महिलाओं ने गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर फूलों से सजाया। निर्धारित शुभ मुहूर्त पर धूप, दीप, नैवेद्य, जल, फल आदि चढ़ाकर पूजा संबंधी सभी प्रक्रियाएं पूरी कीं। इसके बाद गोवर्धन पर्वत की सात परिक्रमा लगाते हुए जयकारे किए। इसे अन्नकूट पूजा भी कहते हैं। नई फसलों से बनाए गए अन्नकूट प्रसाद का भोग लगाया गया। परंपरा के मुताबिक इस दिन एक ही रसोई से पूरे परिवार का भोजन बनता है। लहसुन-प्याज का प्रयोग नहीं हुआ।
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