फोटो- 14 कालिंजर स्थित किला। फाइल फोटो
कुंभ मेले से सबक : भगदड़ से निपटने को विशेष प्रशिक्षण
सुरक्षा, चिकित्सा पर दिए प्रबंधन के विशेष टिप्स
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। बड़े कार्यक्रम हों या मेला अथवा राजनीतिक रैलियां अब ऐसी जगहों पर भीड़ पर प्रबंधन के लिए डिजिटल नक्शे से निगाह रखी जाएगी। इसकी मदद से भगदड़ जैसी स्थिति व अन्य प्रकार की अनहोनी नहीं होगी। घटनाओं से निपटने के लिए दैवी आपदा विभाग, स्वास्थ्य और फायर ब्रिगेड सहित पुलिस को लखनऊ में विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रत्येक जिले में बड़े कार्यक्रम व मेलों के डिजिटल नक्शे और एकत्रित होने वाली भीड़ की संख्या के आधार पर विशेषज्ञ तैयार किए जा रहे हैं। गौरतलब है कि शहर में जनवरी में धीरेंद्र शास्त्री की कथा प्रस्तावित है। इसमें रोज करीब डेढ़ लाख लोगों की भीड़ पहुंचने की बात आयोजकों ने कही है।
दैवी आपदा विभाग बांदा से शामिल आपदा विशेषज्ञ प्रभाकर ने बताया कि प्रयागराज के कुंभ मेले में भगदड़ से सरकार ने सबक लिया है। भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए सरकार दैवी आपदा, स्वास्थ्य व फायर ब्रिगेड के अधिकारियों को बड़े कार्यक्रम, मेला अथवा राजनीतिक रैलियों में भगदड़ से निपटने का विशेष प्रशिक्षण दे रही है। यह प्रशिक्षण लखनऊ में कराया जा रहा है।
बताया कि चार विभागों के समन्वय से प्रत्येक जनपद के बड़े कार्यक्रम व मेलों का डिजिटल नक्शा आदि तैयार कराया गया है। प्रशिक्षण में विशेषज्ञ भगदड़ से निपटने के टिप्स दे रहे हैं। कार्यक्रम में एक लाख की भीड़ को आधार बनाते हुए अचानक होने वाली भगदड़ से निपटने के लिए क्या-क्या व्यवस्थाएं होंगी। कितने गेट, कितनी पुलिस, कितनी एंबुलेंस, कितने फायर टैंकर आदि लगेंगे, संकट की स्थिति में किस मार्ग से आने व जाने दिया जाएगा। भगदड़ में यदि कोई हताहत होता है तो उसे कैसे रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया जाएगा। इसके अलावा यदि आग की घटना होती है तो उससे फायर बिग्रेड कैसे निपटेगी।
इन धार्मिक स्थलों का तैयार कराया गया नक्शा
बांदा की ओर से बड़े आयोजन में सिमौनी, मकर संक्रातिं, कालिंजर कार्तिक मेला, विंध्यवासिनी खत्री पहाड़ के नवरात्र मेले का नक्शा प्रस्तुत किया। बताया गया कि इस मेले में चार से पांच लाख लोग एकत्र होते हैं। विशेषज्ञों ने भविष्य में होने वाली भगदड़ से निपटने के टिप्स दिए। इसी प्रकार अन्य जनपदों ने भी अपने क्षेत्र के बडे कार्यक्रम व मेले के सुरक्षा प्रबंधक पर विशेषज्ञों से चर्चा की।
प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु
जोखिम आकलन-
- प्रत्येक स्थलों की अधिकतम भीड़ क्षमता का निर्धारण। संकरी गलियां, ढलान, सीढि़यों की पहचान करना। मौसम, विद्युत आदि से होने वाले जोखिम का मूल्यांकन। पिछले आयोजन के आधार पर संवेदनशील स्थानों निर्धारण।
मानव संसाधन व तैनाती
भीड़ के आधार पर पुलिस, ट्रैफिक, स्वास्थ्य व फायर की तैनाती। मेला व कार्यक्रम में सीसीटीवी, आपरेटर, क्यूआरटी की तैनाती। कर्मियों को एसओपी, भीड़-व्यवहार तकनीक व संचार प्रशिक्षण।
मेडिकल व फायर सुरक्षा
मेडिकल टीम मय कर्मचारी और एंबुलेंस मार्ग का निर्धारण। फायर टैंकर के आने जाने का अलग-अलग मार्ग निर्धारण। विद्युत लाइनों और अस्थायी संरचनाओं का आयोजन।
तकनीकी तैयारी।
सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन, सर्विलांस और हेटमैप सिस्टम सक्रिय हों। वायरलेस नेटवर्क और संचार चैनल को सक्रिय रखा जाएगा। पीए सिस्टम का परीक्षण और घोषणाओं की रिक्रप्ट पूर्व में तैयार होगी।
वर्जन
बड़े आयोजन, मेला व राजनीतिक कार्यक्रमों में भीड़ का प्रबंधन डिजिटल नक्शे के आधार पर विशेषज्ञों द्वारा दिए गए प्रशिक्षण व मार्गदर्शन के अनुसार किया जाएगा। इससे भगदड़ जैसी घटनाओं पर रोक लगेगी।-कुमार धर्मेंद्र, अपर जिलाधिकारी, बांदा