बांदा। दलित के साथ मारपीट के मामले में अदालत ने दो अभियुक्तों को तीन-तीन साल की सजा सुनाई है। सात अभियुक्तों को दोष मुक्त कर दिया गया। यह फैसला आने में 11 साल का समय लगा। देहात कोतवाली क्षेत्र के हथौरा गांव निवासी तेज बहादुर पुत्र रामकरन ने 25 फरवरी 2006 को दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि गांव के रामकृपाल, राकेश कुमार, वसी अहमद, उबैद अहमद, अति उल्ला, नौशाद अली, फैजउल्ला, इजहार हुसैन व अकरम खां आदि ने अभद्रता करते हुए उसकी लाठी-डंडों से पिटाई की।
जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया और जान से मारने की धमकी देकर चले गए। विवेचना के बाद सभी के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया गया। विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) कैप्टन डीपीएन सिंह की अदालत में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह सेंगर ने मुकदमे की पैरवी की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने रामकृपाल पुत्र नत्थू व राकेश कुमार पुत्र छेदुवां को धारा 325 में तीन-तीन साल की कैद और तीन-तीन हजार रुपये जुर्माना किया। धारा 323, 504 व 506 में एक-एक माह की सजा और तीन हजार रुपये जुर्माना किया। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अन्य सभी आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया गया।