बांदा के देउरा मजरा (जौहरपुर) गांव में आरोपी बलराम सिंह का पैतृक मकान।
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कश्मीर में आईएसआई एजेंटों को पैसा पहुंचाने के जुर्म में मध्य प्रदेश की एटीएस द्वारा भोपाल में दबोचा गया बलराम सिंह बांदा जनपद के जौहरपुर गांव में देउरा मजरा का मूल बाशिंदा है। चार साल पूर्व विदेश जाने की बात कहकर गांव छोड़ दिया था। मध्य प्रदेश एटीएस के मुताबिक वह जासूसी गिरोह का सरगना था। इस गिरफ्तारी के बाद बुंदेलखंड में भी आईएसआई की जड़ें जुड़ी होने के आसार हैं।
मध्य प्रदेश की एटीएस ने दो दिन पूर्व मध्य प्रदेश से 11 लोगों को दबोचा है। इनमें पांच ग्वालियर से, तीन भोपाल से, दो जबलपुर से और एक सतना से गिरफ्तार हुआ है। सतना बांदा जनपद की सरहद से जुड़ा एमपी का जिला है। यहां के कोलनवां (सतना) थाना क्षेत्र से बलराम सिंह नामक युवक को मध्य प्रदेश आतंकवाद निरोधक स्क्वायड (एटीएस) ने दबोचा है।
बलराम मूल रूप से बांदा जनपद के तिंदवारी थानांतर्गत जौहरपुर गांव केे देउरा मजरे का रहने वाला है। उसके कई चाचा अभी यहां रहते हैं। पिता शिव कुमार सिंह बचपन से ही अपने ननिहाल सतना जनपद के सोहास गांव में रह रहे हैं। बलराम उनका सबसे बड़ा बेटा है। उसका छोटा भाई रीवां (एमपी) ननिहाल में रहता है। पिता शिव कुमार के पास 25 एकड़ जमीन है। वह इसमें खेती कराते हैं।
मध्य प्रदेश एटीएस के मुताबिक बलराम पाकिस्तान से मिले पैसे कश्मीर में आतंकियों तक पहुंचाता था। इसके साथी इंटरनेट कॉल को सेल्युलर नेटवर्क में बदलकर दूसरे देशों में बैठे अपने आकाओं तक पहुंचाते थे। इस मामले में टेलीकॉम कंपनियों के कुछ कर्मचारी भी जांच के घेरे में हैं। गिरोह का सरगना बलराम सिंह ही बताया गया है।
उसने दुबई में आईएसआई से ट्रेनिंग ली। जासूसी कर रहे बलराम सिंह की गिरफ्तारी की सूचना मध्य प्रदेश एटीएस ने उसके परिवार वालों को लिखित रूप में दी है।
मध्य प्रदेश एटीएस के मुताबिक आतंकियों को फंड ट्रांसफर और इंटरनेशनल टेलीफोन एक्सचेंज चलाने वाला बलराम सिंह महज 8वीं कक्षा पास बताया गया है। 10वीं की परीक्षा में वह फेल हो गया था।