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अपराधी और शराबी था फांसी पर झूला किसान

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बांदा।‘ बेटी की शादी के छह दिन पूर्व फांसी पर झूला कर्जदार दलित किसान अपराधी और शराबी था। उसे दैवी आपदा नियमों के तहत कोई मदद नहीं दी जाएगी’। मृतक किसान के बारे में यह टिप्पणी बबेरू एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट में दी है। अपर जिलाधिकारी ने भी इस पर मोहर लगाते हुए डीएम के माध्यम से यह रिपोर्ट प्रदेश सरकार को भेज दी है। हैरत की बात यह है कि मृतक के ऊपर लांछन लगाने वाले अधिकारी फौरी तौर पर कोई दलील नहीं दे पा रहे। रिपोर्ट भेजने वाले एसडीएम अब आपराधिक इतिहास के बारे में पुलिस से जानकारी लेने के बारे में कह रहे हैं। उधर, बबेरू कोतवाली प्रभारी का कहना है कि उनकी जानकारी में मृतक किसान के ऊपर कोई ऐसा आपराधिक मामला नहीं था।
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बबेरू तहसील के बेर्रावं गांव में सोमवार की रात घर से कुछ दूर खेत में 55 वर्षीय दलित किसान बंशी पुत्र रामआसरे ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। छह दिनों बाद ही 19 जून को उसकी बेटी शोभा की बारात आनी है। मृतक के पुत्रों ने बताया था कि मात्र दो बीघा जमीन पट्टे पर मिली है। उसमें कुछ खास उपज नहीं होती। पिता मजदूरी करके घर का खर्च चला रहे थे।

बेटी की शादी और दूसरी जरूरतों के लिए गांव के कुछ लोगों से कर्ज ले रखा था। पुत्रों के मुताबिक इसी तनाव में झांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। ‘अमर उजाला’ ने किसान आत्महत्या की खबर 14 जून को प्रमुखता से प्रकाशित की। किसान की आत्महत्या के बाद गांव के लोगों में हमदर्दी जागी। बेटी की शादी नहीं टलने दी। 19 जून को शादी की रस्में सादगी से पूरी होगी।
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लेकिन इस बीच जिला प्रशासन ने दलित मृतक किसान के बारे में प्रदेश सरकार के सचिव एवं राहत आयुक्त को बृहस्पतिवार (15 जून) को भेजे पत्र में कहा है कि मृतक के घर की आर्थिक स्थिति सामान्य है। बबेरू उप जिलाधिकारी की रिपोर्ट का हवाला देकर अपर जिलाधिकारी द्वारा शासन को भेजे पत्र में कहा गया है कि कुछ लोगों ने बताया कि पारिवारिक कलह थी। क्योंकि मृतक शराब का आदी था और पूर्व अपराधिक इतिहास था।

अपर जिलाधिकारी ने शासन को भेजे पत्र में यह भी लिखा है कि मृतक के ऊपर केसीसी या अन्य किसी प्रकार का कर्ज नहीं था। उसकी छोटी पुत्री की शादी 19 जून का नियत है। पत्र में स्वीकारा गया है कि मृतक के पुत्र दिल्ली व पंजाब मजदूरी करने जाते हैं। वह सीमांत कृृषक था। अपर जिलाधिकारी ने कहा कि यह मामला दैवी आपदा के अंतर्गत नहीं है। गौरतलब है कि इसके पहले भी आत्महत्या करने वाले किसानों पर प्रशासन ने कई बार चारित्रिक लांछन लगाए हैं।

शासन को भेजी इस रिपोर्ट के बाबत बबेरू उप जिलाधिकारी सीएल सोनकर से मृतक किसान के आपराधिक इतिहास की जानकारी किए जाने पर उनका कहना था कि यह बबेरू पुलिस बताए। दूसरी तरफ बबेरू कोतवाली प्रभारी रामआसरे से बात की गई तो उनका कहना था कि उनकी जानकारी में मृतक वंशी के ऊपर कोई गंभीर अपराध का मामला दर्ज नहीं है।
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-प्रशासन ने शासन को भेजी रिपोर्ट
-दैवी आपदा प्रकरण मानने से भी इनकार
-किसान की आत्महत्या का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
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