बांदा। बबुली कोल, गौरी और गोप्पा यादव जैसे दुर्दांत डकैत सरगनाओं को ‘घर के बिगडै़ल बच्चे बताकर’ परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह पिछले दिनों जो इशारा कर गए थे, उसका मतलब चित्रकूट के नागर गांव में डकैत बबुली कोल से हुई पुलिस मुठभेड़ के बाद ‘माननीयों’ द्वारा पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिए जाने से समझ में आने लगा है। दस्यु ददुआ को संरक्षण देने में एक पूर्व सांसद को जेल तक जाना पड़ा था। जबकि दो पूर्व विधायकों के खिलाफ दस्यु संरक्षण के मामले अब भी अदालत में विचाराधीन हैं।
हाल ही में बांदा मंडल आए सूबे के परिवहन मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने चित्रकूट में पत्रकारों से बातचीत में डकैतों के बारे में कहा था कि ‘घर के कुछ बिगड़ैल बच्चे हैं जो राह भटक गए हैं। उन्हें राह पर लाने की जरूरत है’। डकैतों के प्रति हमदर्दी भरा परिवहन मंत्री का यह बयान काफी चर्चित हुआ।
हालांकि यह कोई अप्रत्याशित बात या पहला मौका नहीं था। इसके पहले भी नेताओं और दस्यु सरगनाओं का रिश्ता रहा है। पांच दशक से दस्यु समस्या झेल रहे चित्रकूट में डकैतों को राजनीतिक संरक्षण मिलता आया है। इनमें सबसे बड़ा नाम दस्यु सरगना शिव कुमार पटेल उर्फ ददुआ का रहा। ददुआ ‘किंग मेकर’ कहलाता था।
ददुआ को संरक्षण देने में एक पूर्व सांसद (अब दिवंगत) को जेल भी जाना पड़ा था। पुलिस ने ददुआ की गैंग बुक में उनके नाम समेत कई सियासी नेताओं के नाम दर्ज किए थे। पूर्व सांसद रहे भाजपा के एक मौजूदा विधायक और बसपा सरकार के एक पूर्व मंत्री के खिलाफ दस्यु संरक्षण के मामले अब भी अदालत में विचाराधीन हैं।
अब एक बार फिर नेताओं और डकैतों के गठजोड़ को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। तीन दिन पहले चित्रकूट में पुलिस व डकैत बबुली कोल गिरोह के बीच मुठभेड़ हुई थी। नागर गांव की महिला प्रधान ने पुलिस पर मारपीट व ज्यादती का आरोप लगाया था। इसको लेकर सांसद भैरौं प्रसाद मिश्र और चित्रकूट पुलिस अधीक्षक प्रताप गोपेंद्र सिंह के बीच नोंकझोंक भी हुई।
सांसद के दबाव में मानिकपुर थानाध्यक्ष का निलंबन और क्षेत्राधिकारी को पुलिस कार्यालय को संबद्ध कर दिया गया। सांसद और मानिकपुर विधायक ने नागर गांव जाकर पूरे मामले की पड़ताल की। यहां ग्रामीणों ने उन्हें बताया था कि घटना वाले दिन गांव में डकैत आए ही नही थे।
हालांकि सांसद का कहना है कि वह कभी किसी डकैत के पैरोकार नहीं रहे। डकैतों के नाम पर पुलिस बेगुनाह लोगों का उत्पीड़न करेगी तो वह खामोश नहीं बैठेंगे। उधर, चित्रकूट के ही एक अन्य जनप्रतिनिधि का नाम भी दस्यु ठोकिया से संबंधों को लेकर खूब उछला था।
कहा गया था कि डाकू ठोकिया को खुश करने के लिए स्टेनगन उपलब्ध कराई थी। हालांकि इसकी पुष्टि नही हो सकी थी। भरतकूप के मानपुर पडाड़ में मारे गए ठोकिया के बहनोई बंटी लाला और 75 हजार के इनामी शिवमूरत पटेल के पास से स्टेनगन पुलिस को बरामद हुई थी।
-पाठा मेें डकैतों से नेताओं का पुराना रहा है नाता
-दस्यु संरक्षण में जेल तक गए थे पूर्व सासंद
-दो कद्दावर नेताओं पर मामला विचाराधीन
अमर उजाला ब्यूरो