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कोर्ट की अनदेखी पर कोतवाली प्रभारी को जुर्माना

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बांदा। चालान किए गए वाहन की रिपोर्ट दो माह बाद भी न भेजने और तलब किए जाने के बावजूद कोर्ट में उपस्थित न होने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने बांदा शहर कोतवाली को 50 रुपये जुर्माना किया है। पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया है कि कोतवाली प्रभारी के विरुद्ध कार्रवाई करें। उधर, अदालत में लंबित 15 अर्जियों की रिपोर्ट न भेजने पर कोतवाली प्रभारी को 7 सितंबर को कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है।
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बुधवार को सीजेएम द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि 203ए एमवी एक्ट में वाहन अवमुक्त करने के लिए 2 जुलाई 18 को न्यायालय में दी गई अर्जी पर रिपोर्ट तलब की गई थी, लेकिन कोतवाली प्रभारी ने दो माह बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट नहीं पेश की। इस पर 31 अगस्त को कोतवाली को नोटिस जारी की गई थी कि आख्या पेश करते हुए खुद न्यायालय में उपस्थित होकर विलंब का कारण स्पष्ट करें।

इसके बाद भी कोतवाली प्रभारी ने न रिपोर्ट भेजी। न खुद अदालत में पेश हुए। जबकि उन्हें यह नोटिस पहली सितंबर को प्राप्त हो चुकी है। सीजेएम ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि थानाध्यक्ष कोतवाली जानबूझकर न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। न्यायालय के कार्य में बाधा पहुंचा रहे हैं।
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यह अत्यंत आपत्तिजनक है। न्यायालय में उपस्थित न होने और रिपोर्ट पेश न करने पर सीजेएम ने शहर कोतवाली प्रभारी को 50 रुपये से जुर्माने से दंडित किया है। पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया है कि कोतवाली प्रभारी के वेतन से यह जुर्माना राशि काटकर न्यायालय में आख्या पेश करें। साथ ही कोतवाली प्रभारी के विरुद्ध कार्रवाई करें।

दूसरे आदेश में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कहा है कि शहर कोतवाली के 14 मामले उनके न्यायालय में सुनवाई के लिए नियत हैं। इनमें 15 प्रार्थनापत्रों पर कोतवाली नगर प्रभारी ने अब तक अपनी आख्या पेश नहीं की हैं। कई तारीखें बीत चुकी हैं। कई बार 2 या 3 अथवा 5 दिन का समय मांगा। 10 दिन से अधिक बीत जाने के बाद भी आख्या नहीं पेश की गई। यह न्यायालय के आदेशों की अवहेलना है।

सीजेएम ने कोतवाली प्रभारी को आदेश दिया है कि न्यायालय में लंबित सभी प्रार्थना पत्रों में अविलंब आख्या प्रस्तुत करें और बुधवार (5 सितंबर) को सुनवाई के लिए नियत प्रार्थना पत्रों में अपनी आख्या न पेश करने पर 7 सितंबर को स्वयं अदालत में उपस्थित हों और आख्या प्रस्तुत करें। वरना उनके विरुद्ध न्यायालय के काम में बाधा उत्पन्न करने की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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