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गोरक्षा के नाम पर सिर्फ दिखावा

Sun, 07 Aug 2016 11:22 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
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बांदा शहर के कच्चा तालाब में वीरान गो शाला - फोटो : अमर उजाला
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बांदा। गोरक्षकों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तल्ख टिप्पणी बेसबब नहीं है। गोरक्षा के नाम पर यहां भी सिर्फ दिखावा और राजनीति हो रही है। यहां की गोशालाएं वीरान पड़ी हैं। इनके संचालक अपने काम धंधे में व्यस्त हैं। इनमें से ज्यादातर तभी नजर आते हैं जब गो रक्षा को लेकर कहीं कोई माहौल गरमाया हो। राज्य और केंद्र सरकारें भी गो रक्षा के लिए ज्यादा गंभीर नहीं हैं। सिर्फ कुछ आपराधिक धाराएं बनाकर वक्त जरूरत पर उनका इस्तेमाल करने तक ही सरकारी गो रक्षा सीमित हैं।
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पूरा बुंदेलखंड अन्ना पशुओं से हलाकान है। लाखों की तादाद में अन्ना पशु भूखे-प्यासे घूम रहे हैं। इनमें ज्यादातर गायें हैं। भूख मिटाने के लिए ये खेतों में धावा बोलकर किसानों को तबाह करते हैं। इनसे निजात दिलाने के लिए गो शालाएं भी चलाई जा रही हैं, लेकिन कागजों में ज्यादा। धरातल पर इनकी हकीकत कुछ और है।

तीन माह पूर्व भीषण सूखे में भूख प्यास से भटक रहीं गायों को कई गांवों में कैद कर गोशाला का रंग दे दिया गया, जबकि सुविधाएं गोशालाएं जैसी नहीं रहीं। गोशालाओं में भी गायों को भूखा-प्यासा रहना पड़ा। इससे कई की मौत हो गई।
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गोशालाओं की हकीकत जानने के लिए कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं। शहर से मात्र तीन किलोमीटर दूर कच्चा तालाब के पास लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में प्राइवेट गोशाला है। इसे कोई सरकारी मदद नहीं मिलती। शुरू के दिनों में लोगों ने गोशाला के लिए बढ़चढ़कर दान दिया, लेकिन अब दान का जज्बा खत्म हो गया।

गोशाला वीरान है। कहीं गायों को बारिश से बचने के लिए टीनशेड नहीं है। इक्का-दुक्का बचीं गायें पेड़ों के नीचे बैठकर और परिसर में उगी घास खाकर गुजारा कर रही हैं। गोसेवा समिति अध्यक्ष दिनेश सिंह पटेल नौकरी करते हैं।

महामंत्री अरविंद त्रिपाठी व्यापारी हैं। गोशाला की रखवाली और निगरानी मंदिर के पुजारी भगवानदास के जिम्मे है। वे बताते हैं कि 30 साल से गोशाला चल रही है। मौजूदा में 15 गायें हैं। दीवार ढह जाने से ये गोशाला से बाहर फिरती रहती हैं। गोशाला को सरकार से कोई मदद नहीं मिलती। अप्रैल से अब तक कई गायों की मौत हो चुकी है। पशु चिकित्सक दो माह में आते हैं।

बसपा सरकार ने दिए थे 63 हजार रुपये
बांदा। बामदेव गोसेवा समिति महामंत्री अरविंद त्रिपाठी का कहना है कि गोशाला संचालन आसान नहीं। बसपा सरकार में समिति को तीन किस्तों में 63 हजार रुपये मिले थे, लेकिन सपा सरकार में धेला नहीं मिला। न ही भूसा दिया गया।

बताया कि आम लोगों के सहयोग से गोशाला चलाई जा रही है। लगभग 40 क्विंटल भूसा स्टाक में है। गायों के लिए टीनशेड नहीं है। सूखा के चलते दो साल से भूसा-चारा भी दान में नहीं मिल रहा। बड़ी मुश्किल से संचालन हो रहा है।
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