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दांव पर 6.39 लाख बच्चों का भविष्य

Sun, 07 Aug 2016 11:19 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
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बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के परिषदीय स्कूलों में शिक्षण सत्र के साढ़े चार माह बाद भी बच्चों को मुफ्त मिलने वाली सरकारी किताबें नहीं मिलीं। बची-खुची पुरानी किताबों से ही पढ़ाने की औपचारिकता की जा रही है। इसी माह कक्षा एक से आठवीं तक की सेमेस्टर परीक्षाएं होनी हैं। बिना किताबें बच्चे तिमाही परीक्षा देंगे। शासन और बेसिक शिक्षा विभाग की लापरवाही से मंडल में करीब साढ़े छह लाख बच्चों का भविष्य दांव पर है। अधिकारियों की माने तो दो-चार दिन में हिंदी और गणित की किताबें आने की उम्मीद है।
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सर्व शिक्षा अभियान के तहत मुफ्त किताबें, ड्रेस, स्कूल में भोजन आदि की व्यवस्था है। कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर दो साल से परिषदीय स्कूलों का भी शिक्षण सत्र अप्रैल से कर दिया गया है। पिछले वर्ष अगस्त के पहले सप्ताह में बच्चों को किताबें और ड्रेस मिल गई थीं, लेकिन इस वर्ष अभी तक किताबों का अता-पता नहीं है।

चित्रकूटधाम मंडल में बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में जूनियर में 2,06,872 और प्राथमिक स्तर पर 4,32,266 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इनमें सबसे ज्यादा बांदा में 1,73,098 बच्चे 1404 प्राथमिक स्कूलों में हैं। 703 जूनियर स्कूलों में 79,508 छात्र-छात्राएं हैं।
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चित्रकूट में 994 प्राथमिक स्कूलों में 1,04,640 और 481 पूर्व माध्यमिक स्कूलों में 48,016,  महोबा में 676 प्राइमरी स्कूलों में 77,526 और 380 जूनियर स्कूलों में 40,661 बच्चे तथा हमीरपुर में 806 प्राइमरी स्कूलों में 76,962 और 428 जूनियर विद्यालयों में 38,687 बच्चे हैं। ये अभी भी बिना नई किताबों और नई ड्रेस के ही स्कूल आ रहे हैं। उधर, पब्लिक स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों को भी चलाने की सरकारी मंशा पर पानी फिर रहा है। बच्चे और उनके अभिभावक भी मायूस हैं।  

यूआरसी में डंप पुरानी किताबें
बांदा। पिछले शैक्षिक सत्र की बची किताबें यूआरसी और बीआरसी में धूल खा रही हैं। इन्हें न तो वापस भेजा गया और न ही बच्चों को दिया गया। बेसिक शिक्षा विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि पुलिस लाइन स्थित यूआरसी और ब्लाकों के बीआरसी में बड़ी संख्या में किताबें डंप हैं। धीरे-धीरे ये किताबें फटकर बेकार हो रही हैं।   

ड्रेस का बजट आया है। उसे स्कूलों की प्रबंध समितियों के खातों में भेजा गया है। किताबें अभी तक नहीं आईं हैं। सुनने में आ रहा है कि दो-चार दिनों में हिंदी और गणित विषय की किताबें आ जाएंगी। बिना किताबें बच्चों की पढ़ाई तो प्रभावित हो रही है। किताबें आने के इंतजार के अलावा कर ही क्या सकते हैं।
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-शिवनारायण सिंह, बीएसए, बांदा।
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