संग्राम से ‘सरगना’ बना नौगवां गांव के साधारण किसान बलवान सिंह
का बेटा संग्राम सिंह बचपन से बिगड़ैल रहा। उसका मन खेतीबाड़ी में नहीं
लगता था। गांव के प्राइमरी स्कूल में पांचवीं पास करने के बाद सीमावर्ती
खोही (सतना) में आठवीं तक पढ़ाई की।
उन्हीं दिनों वह दस्यु ज्ञान सिंह और
गुलबदन पांडेय (मुतियारी) के संपर्क में आ गया। कुछ दिन उनकी भी बंदूक
तानकर चला। बाद में ठोकिया गिरोह में शामिल हो गया और वर्ष 2010 में मध्य
प्रदेश के मठिया डीह (दमोह) में अपहरण के मामले में नामजद हुआ। इसी वर्ष
हत्या का भी मुकदमा दर्ज हुआ।
संग्राम ने 21 फरवरी 2014 को अपने गांव
(नौगवां) में माली युवक का अपहरण किया। इसके बाद मोतियारी गांव मेें एक और
युवक को अगवा किया। आए दिन गांव में मारपीट और आतंक फैला दिया। डीआईजी
बांदा ने संग्राम सिंह और उसके भाई राजाबाबू पर 12-12 हजार रुपये इनाम
घोषित किया। वह अपना फायर और मैन पावर बढ़ाता रहा।
यह भी चर्चा है कि ज्ञान
सिंह ने सरेंडर से पहले अपनी 375 बोर की मैगनम रायफल संग्राम को दी थी।
इसके अलावा थ्री नाट थ्री की दो और 315 बोर की एक रायफल भी उसके पास थी,
लेकिन अब गिरफ्तारी में इन असलहों का कुछ अता-पता नहीं है। संग्राम ने
इन्हें गायब कर दिया है या फिर पुलिस नहीं बता रही। उधर, नरैनी कोतवाली
प्रभारी राजीव यादव ने बताया कि अब संग्राम सिंह के मददगारों को चिह्नित
करके उन पर कार्रवाई होगी।