पेट्रोल के लिए खड़ा बाइक सवार। संवाद
बांदा। अफवाहों ने पेट्रोल-डीजल की बिक्री में भारी वृद्धि की है। पंप संचालकों का कहना है कि तेल की कमी नहीं है, बल्कि कंपनियों ने उधार सुविधा खत्म कर दी है। विदेशों में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से पेट्रोलियम कंपनियां अब एडवांस भुगतान पर ही तेल दे रही हैं। यही वजह है कि शहर के पांच और जिले के 30 पेट्रोल पंप पूरी तरह से सूखे पड़े हैं। जिन पंपों पर तेल उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं।
दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं। जिले में 100 पेट्रोल पंप हैं। पंप संचालकों का कहना है कि मार्च में त्योहारों की छुट्टियों के कारण बैंक बंद रहे। इससे कंपनियों को समय पर एडवांस पैसा नहीं भेज पाए। कंपनियों ने तेल का उठान कम करने के लिए 25 लाख रुपये तक की उधार सुविधा समाप्त कर दी है।
पंप मालिक एक बार में 50 लाख रुपये का तेल मंगाते हैं। उन्हें दूसरी खेप मंगाने के लिए फिर से एडवांस भुगतान का इंतजाम करना पड़ता है। सोमवार को एडवांस पैसा भेजने पर ही तेल मिलने की उम्मीद है।
आलम यह है कि
स्टॉक खत्म होने के डर से बाइकों को दो से पांच लीटर तक व कार व जीप को पांच से 10 लीटर तक पेट्रोल दिया जा रहा है। इसी प्रकार 25 से 50 लीटर तक डीजल दिया जा रहा है।
10 से 11 लाख लीटर पेट्रोल व 20 लाख लीटर डीजल की बिक्री बढ़ी पेट्रोल, डीजल की किल्लत की अफवाहों के चलते तेल की बिक्री में खासा उछाल आया है। जिन्हें एक लीटर तेल की जरूरत है वह 10 लीटर ले रहा है। 10 वाला 25 लीटर ले रहा है। अचानक बिक्री बढ़ने से पेट्रोल पंप संचालक तेल पूरा नहीं कर पा रहे हैं। जिले में सात मार्च से प्रतिदिन 10 से 11 लाख लीटर पेट्रोल व 20 लाख लीटर डीजल की बिक्री बढ़ी है।
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एडवांस जमा, फिर भी नहीं मिल रहा तेल
तिंदवारी रोड स्थित महादेव पेट्रोल पंप संचालक दीप्ति का कहना है कि एडवांस पैसा जमा होने के बाद भी कंपनी तेल नहीं भेज रही है। स्टाॅक खत्म हो गया है। पदमाकर चौराहा स्थित चौरसियां पेट्रोल पंप संचालक का कहना है कि क्रेडिट खत्म करने से दिक्क्त आ रही है। पेट्रोलियम एसोसिएशन के महामंत्री प्रद्युम्न दुबे लालू का कहना है कि एडवांस जमा के बाद भी कंपनी तेल नहीं दे पा रही है। इसकी वजह कच्चे तेल के दाम बढ़ना है।
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कच्चे तेल के दाम बढ़ने से रुकी आवक
कच्चे तेल के दाम बढ़ने से कंपनियां तेल नहीं देना चाहती थी। इससे तेल की किल्लत बढ़ने लगी थी। हालांकि सरकार ने एक्साइज ड्यूटी कम की है तब कंपनियों ने तेल देना तो शुरू कर दिया लेकिन एडवांस पैसा ले रही हैं। सभी पेट्रोल पंप संचालक एडवांस पैसा जमा करके नियमित तेल नहीं मंगा सकते हैं। एक खेप में 50 लाख से अधिक लगते हैं।
- प्रभाकर सिंह, अध्यक्ष, पेट्रोलियम एसोसिएशन
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गैस हो या पेट्रोल-डीजल सब पर नजर रखी जा रही है। डीलर्स से बातचीत कर एजेंसियों को गैस व पंपों को तेल दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
क्यामुद्दीन, जिला पूर्ति अधिकारी, बांदा
पेट्रोल के लिए खड़ा बाइक सवार। संवाद