फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर जताया विरोध

Mon, 28 Dec 2015 11:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
विज्ञापन
विज्ञापन
बांदा। मुख्यमंत्री भले ही सूखे से जूझ रहे बुंदेलखंड में किसानों की हमदर्दी का ढिंढोरा पीट रहे हों लेकिन उनके अफसर परेशान किसानों का मजाक उड़ाने से बाज नहीं आ रहे।
विज्ञापन


मदद के नाम पर किसानों की उड़ाई गई खिल्ली के ताजे मामले में उन्हें 23 रुपये से लेकर 91 रुपये तक के चेक दिए गए हैं।

इससे भड़के किसानों ने सोमवार को मुख्यालय में प्रदर्शन किया और चेक वापस देने की कोशिश की। डीएम ने इस मामले में तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

नरैनी क्षेत्र के घसराउट, टेढ़ा, नौगवां, गहला, नीबी, चिमनीपुरवा, कछियनपुरवा, गोपरा, पिपरा, नरसिंहपुर, सुलखान पुरवा आदि गांवों में हाल ही में तहसीलदार ने किसानों को चेक बांटे हैं।
विज्ञापन


इनमें तमाम किसानों को 23 से लेकर 91 रुपये तक दिए गए हैं। सोमवार को विद्याधाम समिति सचिव राजाभइया के नेतृत्व में इन गांवों के किसानों ने मुख्यालय आकर कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया।

महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल थीं। किसान चेक वापस देने आए थे। वीडियो कांफ्रेसिंग में व्यस्त डीएम का कई घंटे इंतजार किया। डीएम सुरेश कुमार ने किसानों को भरोसा दिलाया कि वे इस मामले की तत्काल जांच करा रहे हैं।

मंगलवार को जांच रिपोर्ट उन्हें मिल जाएगी। दोषियों पर कार्रवाई करेंगे। डीएम ने किसानों की मांग पर मंगलवार से ही गांवों में मनरेगा कार्य शुरू कराने के आदेश दिए। डीएम के साथ सीडीओ राम कुमार, एडीएम डीएस पांडेय, सिटी मजिस्ट्रेट आरके श्रीवास्तव भी मौजूद रहे।

इतनी कम राशि के चेक जारी किए जाने के सवाल पर नरैनी तहसीलदार गिरिवर सिंह का कहना है कि शासन का आदेश था कि किसी भी किसान को 1500 रुपये से कम की मदद न दी जाए।

इसके तहत पूर्व में चेक जारी किए गए थे। बाद में शासन ने असिंचित भूमि वाले किसानों को मदद की रकम 4500 से बढ़ाकर 6800 प्रति एकड़ कर दी।

नए शासनादेश के तहत जिन किसानों को पिछली बार जितना कम पैसा मिला है, वह अंतर राशि के रूप में इन चेकों के माध्यम से दिया गया है।

तहसीलदार का यह भी कहना है कि ज्यादातर किसानों का पैसा उनके खातों में भेज दिया गया है। चेक उन्हीं के जारी हुए हैं, जिनके खाता नंबर राजस्व विभाग के पास नहीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें