बांदा। बीत रहे साल में कृषि क्षेत्र में बुंदेलखंड
को कई उपलब्धियां हासिल हुई हैं। मंडल के इकलौते कृषि विश्वविद्यालय में
तिल और गेहूं पर दो शोध परियोजनाएं बनाकर वित्त पोषण के लिए विभिन्न
संस्थाओं को भेजी गई हैं।
उधर प्रदेश सरकार ने बुंदेलखंड के सभी
छह विज्ञान केंद्र बांदा कृषि विश्वविद्यालय को हस्तांतरित करने के लिए की
मंजूरी दे दी है। कृषि विश्वविद्यालय में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 16
विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों से समझौते पर करार की प्रक्रिया शुरू हो गई
है।
इस साल दैवी आपदाओं ने किसानों को जमकर बर्बाद किया। दूसरी तरफ कृषि क्षेत्र में बुंदेलखंड को कई सौगातें भी मिली हैं।
मंडल
मुख्यालय में स्थित बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय का प्रथम
दीक्षांत समारोह भी इस वर्ष के अंतिम माह में हुआ। इसमें प्रदेश के
राज्यपाल सहित केंद्र सरकार के वरिष्ठ कृषि अधिकारी शामिल हुए।
दीक्षांत
समारोह के बाद प्रदेश सरकार ने बुंदेलखंड के हमीरपुर, महोबा, जालौन,
ललितपुर और झांसी में चल रहे कृषि विज्ञान केंद्रों को भी बांदा कृषि
विश्वविद्यालय के हवाले करने की मंजूरी दे दी है।
अब तक ये केंद्र
कानपुर स्थित चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से
संबद्ध थे। बांदा कृषि विश्वविद्यालय ने इस वर्ष एक और कदम बढ़ाया है।
कृषि
और पशु पालन को बढ़ावा देने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 16
विभिन्न संस्थानों से समझौता करने की प्रक्रिया शुरू की है।
कृषि
वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे बुंदेलखंड की प्रमुख फसलों और बागवानी में
प्रमुख अनुसंधान संस्कृतियां होने से किसान आर्थिक रूप से मजबूत होंगे।