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कोचिंग सेंटर किराये के कमरों में चलते मिले

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बांदा। ऑनलाइन पढ़ाई की आड़ में कई कोचिंग संचालक प्रशासन की नजर बचाकर चोरी-छिपे कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। किराये के कमरों में शासनादेश और कोविड गाइडलाइन का उल्लंघन कर बच्चों को बैठाया जा रहा है।
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शनिवार को सुबह डीआईओएस ने शहर में संचालित कई कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण किया। कोरोना संक्रमण काल में स्कूल-कॉलेज में कक्षाएं न चलने से अध्यापक ऑनलाइन के माध्यम से छात्र-छात्राओं को पढ़ा रहे हैं। कई विद्यालयों में व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से शिक्षा दी जा रही है। इसकी आड़ में कोचिंग संचालकों ने भी अपनी दुकानें खोल लीं। कई दिनों से कोचिंग संचालन की लगातार मिल रहीं शिकायतों के मद्देनजर डीआईओएस विनोद सिंह ने कई कोचिंग सेंटर का निरीक्षण किया। एक कोचिंग सेंटर में वित्तविहीन विद्यालय के शिक्षक पढ़ाते मिले।
यहां 15 से 20 बच्चे पाए गए। कटरा में भी कोचिंग में छात्र-छात्राएं पढ़ते मिले। यहां भी शासनादेश का उल्लंघन कर कोचिंग संचालित की जा रही थी। वन विभाग रोड पर कोचिंग सेंटर में 30 से 35 विद्यार्थी पाए गए। उधर, डीआईओएस विनोद सिंह ने बताया कि शासनादेश का उल्लंघन कर कोचिंग संचालन मिला। रजिस्ट्रेशन के सत्यापन के लिए निर्देश दिए गए हैं। कोचिंग संचालकों से जवाब-तलब किया है। इन सभी को कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। कहा कि सुधार न होने पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
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बच्चों के स्कूली बैग का कम हो वजन
बांदा। प्राइवेट स्कूलों में अध्ययनरत मासूमों के कंधों से बस्ते का बोझ कम करने की मांग की है। जिला अधिवक्ता संघ पूर्व अध्यक्ष व भाजपा नेता अशोक त्रिपाठी जीतू ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को भेजे पत्र में कहा कि हाईकोर्ट मद्रास के आदेश के क्रम में मानव संसाधन मंत्रालय ने नई स्कूल पॉलिसी जारी की थी, लेकिन इस आदेश पर आज तक निजी शिक्षण संस्थानों ने अमल नहीं किया।
कहा कि स्कूलों में न ही एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम चलाया जा रहा और न ही बस्ते का बोझ कम किया गया है। कक्षा एक में प्राइवेट प्रकाशनों की मनमानी महंगी व गुणवत्ता विहीन 10 से 15 किताबें चलाई जा रही हैं। शिक्षण संस्थानों का प्रकाशक/डीलरों से अच्छा खासा कमीशन बंधा है। स्कूल प्रबंध तंत्र बच्चों को प्राइवेट प्रकाशनों की किताबें खरीदने के लिए मजबूर करता है। हैरत की बात यह है कि स्कूल प्रबंधतंत्र प्रति वर्ष 80 फीसदी किताबों को बदल देता है, ताकि उन किताबों का उपयोग कोई दूसरा बच्चा न कर सके। हाल ही में चित्रकूट के चिंतन शिविर में आरएसएस के प्रमुख डा. मोहन भागवत ने भी बच्चों के स्कूल बैग के बोझ पर चिंता जताई है। इस पर चर्चा की बात कही है। जीतू ने मंत्री से बच्चों का मानसिक व शारीरिक शोषण रोकने के लिए स्कूल बैग के वजन को कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। (संवाद)
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