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Banda News: डीजल अनियमितता की जांच पर संकट के बादल

Fri, 14 Aug 2026 11:33 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
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बांदा। रोडवेज डिपो बांदा में सामने आई 14 हजार लीटर डीजल की अनियमितता की जांच अब अधर में पड़ती नजर आ रही है।
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जांच अधिकारी एआरएम वित्त एसके गुप्ता सेवानिवृत्त हो चुके हैं। ऐसे में जांच की आगे की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। जांच शुरू होने के बाद ही डीजल विभाग के नियमित अभिलेख अपडेट न होने की बात सामने आ गई है।

जुलाई में डिपो में 14 हजार लीटर डीजल की अनियमितता का मामला सामने आया था। प्रारंभिक जांच में डीजल घोटाले के बजाय रिकॉर्ड और प्रक्रिया में अनियमितता की बात सामने आई थी। अधिकारियों के अनुसार आठ जुलाई को 14 हजार लीटर डीजल लेकर टैंकर डिपो पहुंचा था।
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टैंक में जगह नहीं होने के कारण टैंकर तत्काल खाली नहीं हो सका, लेकिन अभिलेखों में उसी दिन डीजल खाली होना दर्ज कर दिया गया। बाद में नौ जुलाई को टैंकर खाली कराने की बात कही गई।
प्रकरण की विस्तृत जांच एआरएम वित्त एसके गुप्ता को सौंपी गई थी। हालांकि जांच के दौरान डीजल विभाग के नियमित अभिलेखों के अपडेट न होने की स्थिति सामने आई। इससे डीजल की वास्तविक आवक और खपत का मिलान करना मुश्किल हो गया। बताया जाता है कि जांच अधिकारी ने भी इस स्थिति को देखते हुए जांच अपने स्तर से हटाकर किसी अन्य अधिकारी को सौंपने की मांग की थी। इसके बावजूद उन्हें ही जांच जारी रखने के निर्देश दिए गए।
उधर, अब जांच अधिकारी के सेवानिवृत्त होने के बाद जांच की प्रगति पर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि नए सिरे से जांच अधिकारी नियुक्त किया जाता है तो उसे पूरे प्रकरण और उपलब्ध अभिलेखों को समझने में भी समय लग सकता है। इधर निलंबित स्टेशन प्रभारी आरके वर्मा के वीआरएस के लिए आवेदन करने की चर्चा से डिपो में चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
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पांच पर कार्रवाई, लेकिन जांच का निष्कर्ष अब भी बाकी

प्रकरण में अब तक पांच लोगों पर कार्रवाई हो चुकी है। शिकायत के बाद डीजल लिपिक अनिल साहू, अनिल शुक्ला और सुधीर को निलंबित किया गया था। इसके बाद शासन ने शिथिल पर्यवेक्षण के लिए वरिष्ठ स्टेशन प्रभारी सुशीला सचान और स्टेशन प्रभारी आरके वर्मा को निलंबित कर दिया।
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जूनियर फोरमैन सरोज कुमार को आरोप पत्र भी जारी किया गया है। लेखाकार वीके गुप्ता के खिलाफ भी कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा गया था। कार्रवाई के बावजूद मूल सवाल अब तक बना हुआ है कि डीजल की वास्तविक स्थिति क्या थी और अभिलेखों में अनियमितता कैसे हुई। जांच पूरी होने के बाद ही इसकी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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