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Banda News: पानी शुद्ध करने के लिए फिटकरी के नाम पर मिट्टी का घोल

Thu, 19 Feb 2026 11:01 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
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फोटो- 21 भूरागढ़ में स्थित ट्रीटमेंट प्लांट में जमी मिट्टी व घासफूस। संवाद
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बांदा। इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों की भयावहता के बावजूद जिले का जल संस्थान पीने योग्य साफ पानी नहीं उपलब्ध करा पा रहा है। शहर में हर साल लाखों रुपये की लागत से ब्लीचिंग पाउडर और फिटकरी खरीदी जाती है लेकिन इसका उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है। आरोप है कि ट्रीटमेंट प्लांटों में पानी को शुद्ध करने के नाम पर घटिया गुणवत्ता वाली फिटकरी का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसमें पीली मिट्टी और कंकड़ मिले हुए हैं। इस वजह से पानी साफ होने के बजाय और भी गंदा हो रहा है।
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शहर में जल संस्थान के करीब 56 हजार कनेक्शन धारक हैं। जिन्हें केन नदी और नलकूपों से पानी की आपूर्ति की जाती है। भूरागढ़ और कैलाशपुरी स्थित ट्रीटमेंट प्लांटों से पानी को साफ कर शहर के नौ ओवरहेड टैंकों में स्टोर किया जाता है। लेकिन इस पानी का ट्रीटमेंट करने में उपयोग होने वाली फिटकरी और ब्लीचिंग की गुणवत्ता इतनी खराब है कि यह पानी को शुद्ध करने की जगह उसे और गंदा कर रही है। फिटकरी में मिलाई जा रही पीली मिट्टी और कंकड़ न केवल पानी को दूषित कर रहे हैं, बल्कि ट्रीटमेंट प्लांट की टंकियों में तलछट के रूप में जमा हो जाते हैं।



चिंताजनक बात यह कि ट्रीटमेंट प्लांटों और ओवरहेड टैंकों की वर्षों से सफाई नहीं हुई है। जबकि शासन के निर्देशानुसार हर तीन या छह महीने पर इनकी सफाई किया जाना अनिवार्य है। इस उपेक्षा के कारण पानी की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ रहा है। हालत है कि सिर्फ टंकी के ऊपर अंकित सफाई की तिथि को बदल दिया जाता है। क्योंकि विभाग के पास सफाई का कोई लेखा-जोखा नहीं है।
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पानी की मांग और उपलब्धता



जनसंख्या कनेक्शन जरूरत (MLD) उपलब्धता (MLD)

195362 56000 21 19

इनसेट-

गर्मी के साथ ही गहराने लगा पानी संकट



गर्मी ने दस्तक दे दी है। ऐसे में शहर में पानी का संकट गहराने लगा है। मोहल्ला जरैली कोठी, बाकरगंज, न्यू मार्केट, क्योटरा क्राॅसिंग, नोनिया मोहाल, कंचनपुरवा, पीली कोठी, अर्दली बाजार, बलखंडी नाका समेत कई मोहल्लों दो दिन से पानी नहीं आ रहा है। लोग भुलाए जा चुके कुएं और हैंडपंप की दौड़ लगा रहे हैं। नलों में पानी का फोर्स नहीं है। बिना टुल्लू पंप के पानी आता ही नहीं। इधर, दो दिनों से पानी आ ही नहीं रहा है। शहर के ज्यादातर कुओं से पानी की सप्लाई होती है। जिन्हें जल संस्थान ने पूरी तरह से लोहे की जाली से ढक रखा है। उधर, 80 फीसदी हैंडपंप पहले ही खराब पड़े हैं।





केस-1

कटरा निवासी रामदयाल का कहना है कि नलों में गंदा पानी आता है। वर्षों से टंकियां साफ नहीं की गईं हैं। कभी-कभी तो पानी में बदबू भी आती है। जिसे गर्म करके पीने के योग्य बनाया जाता है।



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केस-2



नोटिया मोहाल निवासी शंभू का कहना है कि जल संस्थान प्रतिवर्ष 13 रुपये जलमूल्य लेता है। इसके बाद भी पीने का शुद्ध पानी नहीं उपलब्ध करा रहा है। नलों से मटमैला पानी आ रहा है।

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केस-3



पीली कोठी निवासी श्यामू का कहना है कि जल संस्थान के अधिकारियों का फिटकरी व ब्लीचिंग सप्लायर से अच्छा खासा कमीशन बंधा है। पानी में घटिया फिटकरी व ब्लीचिंग डाली जा रही है जिससे पानी शुद्ध नहीं हो रहा है।

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केस-4



अर्दली बाजार के राघव का कहना है कि दो दिन से नलों में पानी नहीं आ रहा है। जब नलों में पानी आता है तो शुरूआत में पांच मिनट तक गंदा पानी आता है। ब्लीचिंग का असर दिखता ही नहीं है।





वर्जन-



केन नदी से पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। किसी तरह मांग के अनुरूप 80 फीसदी पानी उपलब्ध करा रहे हैं। ठंड के कारण टंकियों को साफ नहीं कराई गई थी। जल्द सफाई कराई जाएगी। फिटकरी में मिट्टी और कंकड़ मिले होने की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो जांच के लिए भेजा जाएगा। मिलावट सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी।
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- शिवराज वर्मा

अधिशासी अभियंता



जल संस्थान, बांदा

फोटो- 21 भूरागढ़ में स्थित ट्रीटमेंट प्लांट में जमी मिट्टी व घासफूस। संवाद

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