बांदा। एक माह के कोरोना कर्फ्यू/लॉकडाउन के बाद पहली जून से शासन की ओर से मिली ढील के पहले दिन बाजारों में खासी चहलपहल रही। रोजमर्रा की दुकानों में तो लोगों की भीड़ दिखाई दी। पर बड़े शोरूम में दो से चार की संख्या में ग्राहक खरीदारी करते नजर आए।
सहालग के दौर में कपड़ा, बर्तन, सराफा और इलेक्ट्रॉनिक बाजार में ज्यादा भीड़ नहीं नजर आई। अस्सी फीसदी ग्राहक व दुकानदार मास्क और सैनिटाइजर के साथ दुकानों में खरीद-फरोख्त करते रहे। बाजार में कहीं पर भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं दिखा। दुकानों के सामने चूना-कलई के गोले भी नहीं लगे दिखाई दिए। अधिकांश दुकानदारों ने बताया कि आज पहला दिन है। 50 फीसदी ग्राहक ही बाजार में आया है।
हालांकि, एक माह के अंतराल पर बाजार को करोड़ों की चपत लगी है। दुकानें सुबह सात बजे से शाम 7 बजे तक खुलने के ही आदेश है। गर्मी के सीजन में ज्यादातर दुकानदारों का कहना था कि रात नौ बजे तक दुकानें खोले जाने की अनुमति मिलनी चाहिए थी। सहालग के सीजन एक माह से दुकानदारी नहीं हो पाई है। उधर, ग्राहक बाजार खुलने से खुश नजर आए और कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए खरीदारी करने की बात कही।
नहीं हो पा रही थी रुटीन शॉपिंग
बसंत विहार की रहने वाली कोमल ने बताया कि रूटीन शापिंग नहीं हो पा रही थी। कोविड-19 गाइडलाइन के चलते सभी बाजार पूरी तरह से बंद थे। परिवार में शादी वगैरह होने से वह गहनों की खरीदारी नहीं कर पा रहीं थीं। आज से दुकानें खुलीं हैं तो वह खरीदारी के लिए आई हैं। कोविड गाइडलाइन का पालन सभी करें, ताकि इसे फैलने से रोका जा सके।
नहीं कर पा रहे थे शादी की खरीदारी
खाईंपार की रेखा ने कहा कि घर में भाई की शादी है। कोरोना कर्फ्यू और लॉकडाउन की वजह से सभी दुकानें बंद थीं तो शादी की खरीदारी नहीं हो पा रही थी। एक जून से दुकानें खुलने का आदेश हुआ तो वह कपड़े की खरीदारी करने आई है। बाजार खुलने से अच्छा लगा।
कपड़ा व्यवसायी राजकुमार कुकरेजा ने कहा कि एक माह के कोरोना कर्फ्यू में 10 से 12 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। सहालग का समय लगभग निकल गया है। पहले दिन कपड़ा बाजार में अपेक्षाकृत भीड़ कम है। व्यापार नुकसान पर है।
इलेक्ट्रॉनिक व्यवसायी सतबिंदर सिंह ने कहा कि कोरोना कर्फ्यू से इलेक्ट्रानिक व्यवसाय को 15 से 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। दुकानें बंद होने से रोजमर्रा बिकने वाले छोटे आइटमों की भी खरीद ठप रही। पहले दिन भी अपेक्षाकृत ग्राहक नहीं आए हैं।