समाजवादी पेंशनधारकों को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा सीधे भेजे गए संदेश पत्रों कोे लाभार्थियों के हाथों न देकर कूड़े में फेेंक दिए जाने के मामले में शासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। पहली गाज यहां के जिला समाज कल्याण अधिकारी पर गिरी है। उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। कार्रवाई के घेरे में डाक विभाग भी है। उसके खिलाफ भी कार्रवाई के लिए लिखा गया है। मुख्यमंत्री के पत्रों को फेंकने का भंडाफोड़ ‘अमर उजाला’ ने किया था।
बांदा जनपद के 97 हजार समाजवादी पेंशन लाभार्थियों को मुख्यमंत्री अलिखेश यादव ने अपने हस्तक्षरों वाले पत्र जारी किए थे। इन्हें लाभार्थियों तक पहुंचाने का जिम्मा समाज कल्याण विभाग को दिया गया था। समाज कल्याण विभाग ने इन्हें डाक विभाग से भिजवाया था। 10 सितंबर को महुआ ब्लाक के पहाड़पुर गांव के पास मुख्यमंत्री के पत्र बड़ी संख्या में नाले किनारे पडे़े मिले। यह खबर ‘अमर उजाला’ ने 12 सितंबर को ‘कूड़े में फेंके गए मुख्यमंत्री के संदेश पत्र’ शीर्षक से छापी थी। इस पर तत्कालीन डीएम योगेश कुमार ने सीडीओ राम कुमार सिंह और परियोजना निदेशक आरके मिश्रा को जांच के लिए मौके पर भेजा था। उनके साथ समाज कल्याण अधिकारी मुकेश कुमार गुप्ता भी थे।
सीडीओ और परियोजना निदेशक ने जांच के बाद डीएम को अपनी रिपोर्ट में मुख्यमंत्री के पत्रों की दुर्दशा के लिए प्रथम दृष्टया डाक विभाग और समाज कल्याण विभाग को दोषी बताया था। रिपोर्ट में कहा कि यह विभाग अगर सतर्कता बरतते तो यह स्थिति न होती। अधिकारियों ने लिखा था कि इसमें चूक की गई है। अधिकारियों की यही रिपोर्ट डीएम ने शासन को भेज दी। इस पर शासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिला समाज कल्याण अधिकारी मुकेश कुमार गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन पत्र उन्हें बुधवार को भेजा गया। प्रदेश के प्रमुख सचिव (समाज कल्याण) ने इस बाबत डीएम को पत्र भेजा है। चित्रकूटधाम मंडल के प्रभारी समाज कल्याण उप निदेशक एसएन त्रिपाठी ने इसकी पुष्टि की। निलंबित समाज कल्याण अधिकारी को लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध किया गया है। उप निदेशक ने बताया कि शासन ने आरोप पत्र भी मांगा है। प्रकरण की जांच कानपुर के समाज कल्याण उप निदेशक करेंगे।