समस्याओं का निस्तारण न होने पर मंगलवार को यहां ग्रामीणों का तहसील दिवस पर गुस्सा फूट पड़ा। गेट बंद कर कर्मचारियों और फरियादियों को देर तक कैद रखा। महिलाओं की मांग थी कि पूर्ति विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
सिपाहीलाल का पुरवा (ओरन ग्रामीण) की महिला-पुरुषों ने जय हिंद सेवादल अध्यक्ष श्यामाचरण वाजपेयी की अगुवाई में प्रशासन के खिलाफ नारे लगाते हुए तहसील का गेट बंद कर दिया। उनका आरोप था कि गांव में काम नहीं मिल रहा है। पति, बच्चे व बुजुर्ग परदेस में पलायन को मजबूर हैं।
कोटेदार पूर्ति निरीक्षक से साठगांठ कर राशन व मिट्टी के तेल की कालाबाजारी कर रहा है। घर में फाकाकशी की नौबत है। पिछले दिनों तहसील दिवस में डीएम को अर्जी दी, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। छह माह से मनरेगा मजदूरी नहीं मिली। सूखा राहत का पैसा कमीशन की भेंट चढ़ गया। लोहिया व इंदिरा आवास अपात्रों को बेंच और हैंडपंप की मरम्मत में पैसा हजम करने के आरोप लगाए। लगभग एक घंटा बाद तहसीलदार वीरेंद्र कुमार ने आक्रोशित ग्रामीणों को कार्रवाई का भरोसा देकर शांत किया और गेट खुलवाया। प्रदर्शनकारियों में चंदी, रमकलिया, कलावती, तुलसा, केता बाई, शिवप्यारी, चुनूबादी, फूलन, विद्या देवी, सुमन, भूरी, रानी, माया, गुड़िया, सरोज, सूरजकली, छोटा, रंजीत, ज्ञानबाबू, चंद्रपाल आदि मौजूद रहे।