अतर्रा। लगातार बारिश से रहुसत माइनर की प्रथम शाखा में पानी बढ़ने से पटरी के ऊपर से पानी खेतों में पहुंच गया।
इससे रहुसत गांव के एक दर्जन से अधिक किसानों की करीब 100 बीघे में रोपी गई धान की फसल जलमग्न हो गई है। खेतों में पानी भरा होने से फसल सड़ने लगी है। किसानों ने शनिवार को जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर जल निकासी की व्यवस्था कराने और फसल बचाने की मांग की।
किसानों का कहना है कि बारिश के साथ माइनर का पानी ओवरफ्लो होकर खेतों में पहुंच रहा है। माइनर की पटरी कई जगह से कमजोर होने के कारण भी पानी खेतों की ओर पहुंच रहा है। किसानों के मुताबिक जल्द जल निकासी नहीं हुई तो उन्हें लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा।
रहुसत निवासी किसान प्रिंस तिवारी ने बताया कि करीब 30 बीघे में धान की फसल पानी में डूबी है। तिंदुही गांव के किसान गणेश प्रसाद गर्ग ने बताया कि उनके 14 बीघे खेतों में धान की फसल जलमग्न है।
किसान रामस्वरूप, रमेश, केदार, होरीलाल, चुन्नू प्रजापति, मंगल और गुनगुन ने बताया कि कई जगह फसल पानी में डूबी है और सड़ने लगी है। किसानों ने डीएम से मौके का निरीक्षण कराकर माइनर की पहली शाखा का मुंह चौड़ा कराने, जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त कराने और खेतों में भरे पानी को बाहर निकालने की व्यवस्था कराने की मांग की। प्रार्थना पत्र देने वालों में पिंकू, आशू कुमार, शिवकुमार, हरिशंकर, श्रीराम, रज्जू समेत अन्य किसान शामिल रहे।
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तीन दिन पहले बोरी-मिट्टी से किया सुधार : जेई
केन कैनाल परियोजना के जेई मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि तीन दिन पहले संबंधित कर्मचारियों के साथ मौके पर जाकर मिट्टी और बोरियों के माध्यम से समस्या में सुधार कराया गया था। वर्तमान में नहर बंद है। साढ़े तीन किलोमीटर लंबी नहर में बारिश का पानी बह रहा है। उन्होंने नहर की पटरी में कटान जैसी किसी समस्या से इन्कार किया।
फोटो-15-खेतों में पानी भरने से जलमग्न हुई धान की फसल। संवाद