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बुंदेलखंड के ‘लाल सोने’ पर बाहरी कारोबारियों की निगाहें

Sat, 24 Jan 2015 11:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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बुंदेलखंड का ‘लाल सोना’ यानि बालू पर अब प्रदेश के माफिया और बड़े बालू कारोबारियों की नजरें गड़ गई हैं। इसी माह यहां तीन नदियों में स्थित 15 खदानों के खनन पट्टे किए जा रहे हैं। खनिज विभाग ने इसके लिए नोटिस जारी कर दी है।
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खदानों के पट्टे हथियाने के लिए बुंदेलखंड के अलावा प्रदेश के कई महानगरों और उत्तराखंड के भी बालू कारोबारियों ने यहां डेरा डाल दिया है। इनमेें अगर लामबंदी न हुई तो प्रतिस्पर्द्धा में खनिज विभाग को पट्टा टेंडर में काफी बढ़कर राजस्व मिलेगा।

एक दर्जन खदानों पर खनिज विभाग पट्टे पहले ही कर चुका है। इन पर रात-दिन वैध और अवैध खनन धड़ल्ले से हो रहा है। अब खनिज विभाग ने जनपद में यमुना, केन और बागै नदियों की 15 बालू खदानों का पट्टा करने के लिए नोटिस जारी करते हुए आवेदन मांगे हैं।
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यहां जिलाधिकारी कार्यालय (खनिज अनुभाग) में यह आवेदन 30 जनवरी तक सीलबंद लिफाफे में प्राप्त किए जाएंगे। 6 फरवरी को कलेक्ट्रेट में यह टेंडर खोले जाएंगे। आवेदन शुल्क 5000 रुपये और अन्य खर्च के नाम पर 10,000 रुपये चालान के जरिए जमा कराए जा रहे हैं।

जिन खदानों का पट्टा होना है उनमें सादी मदनपुर (पैलानी), सबादा खादर (पैलानी), मरका खादर (बबेरू), सिंधनकलां (पैलानी), बदौसा (अतर्रा) और लोहरा (बबेरू) शामिल हैं। इनमें से पैलानी क्षेत्र की खदानें ज्यादा फायदेमंद हैं।

कई गुना कमाई के चक्कर में इन खदानों का पट्टा लेने के लिए स्थानीय बालू कारोबारियों के अलावा इलाहाबाद, कानपुर, लखनऊ, हमीरपुर, फतेहपुर, प्रतापगढ़ और उत्तराखंड राज्य के देहरादून के बालू व्यवसायियों ने भी बांदा में डेरा डाल दिया। लग्जरी वाहनों में आए यह कारोबारी शहर के होटलों में ठहरे हुए हैं और बालू खदानों को मौके पर जाकर जायजा ले रहे हैं।

इन बाहरी कारोबारियों की आमद से बालू के स्थानीय कारोबारियों में बेचैनी बढ़ गई है। वह अपना वर्चस्व बरकरार रखना चाहते हैं। यह भी चर्चा है कि बाहरी कारोबारियों की घुसपैठ रोकने के लिए स्थानीय बालू व्यवसायी कोर्ट का सहारा ले सकते हैं। प्रस्तावित खदानों के पट्टे का स्टे आ सकता है।

आम खरीदार की कट रही जेब  
बांदा। बालू की खदानों का पट्टा हथियाने के लिए बांदा और बुंदेलखंड समेत प्रदेश के पूंजीपति बालू कारोबारी यूं ही परेशान नहीं है। दरअसल आम खरीदार की जेब से जाने वाली रकम और सरकार को मिलने वाले राजस्व में करीब कई गुने का अंतर है। इससे धंधे में कमाई का अंदाजा लगाया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि बालू खरीददार आम उपभोक्ता को सरकारी दर से पांच गुना ज्यादा कीमत पर बालू खरीदनी पड़ रही है। बालू की सरकारी रॉयल्टी (राजस्व) 75 रुपये प्रति घन मीटर है। 10 टायर वाले एक ट्रक में ओवर लोडिंग करके 20 घन मीटर बालू भरी जा रही है। इसमें रायल्टी के रूप में सरकार को सिर्फ 1500 रुपये मिल रहे हैं जबकि बालू का यह ट्रक कम से कम 11,000 रुपये में बिक रहा है। बांदा जनपद के बाहर बालू जाने पर दूरी के साथ ही दरें भी बढ़ जाती हैं।

‘अफसरों की मिलीभगत से बना है नदी पर पुल’
बांदा। बुंदेलखंड आरटीआई फोरम और प्रवास सोसायटी के आशीष सागर तथा राजेंद्र मिश्र ने कमिश्नर व डीएम को शिकायती पत्र दिया है। इसमें केन नदी की जल धारा बांधकर अवैध पुल बनाए जाने को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी बताई है। कहा है कि बिना पुलिस और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत के बिना ऐसा नहीं हो सकता।

साथ ही आरोप लगाया है कि बालू सिंडीकेट और पट्टेधारकों के दबाव में पीडल्ब्यूडी अधीक्षण अभियंता ने छेहरावं पथरी खदान में सशर्त अनुमति प्रदान कर दी है। यह वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के विरुद्ध है। सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और एनजीटी के आदेशों की अनदेखी करके मंडल में अवैध खनन का खेल चल रहा है। इसे रोका जाना चाहिए।
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