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बुंदेलियों को हरियाली के बदले हीरे मंजूर नहीं

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bundeliyo ko hariyali ke badle dimond manjoor nahi - फोटो : BANDA
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बांदा। हरियाली के बदले हीरों के विरोध में डटे बुंदेलियों और पर्यावरण प्रेमियों ने बुंदेलखंड के बकस्वाहा जंगल को बचाने का आंदोलन और तेज कर दिया है। शनिवार को विश्व पर्यावरण दिवस पर जंगल में पर्यावरण के पैरोकारों का जमघट रहा। मशहूर समर्थ सद्गुरु भइया जी भी उपस्थित थे। भारी तादाद में उपस्थित ग्रामीणों के बीच उन्होंने हीरा खदान योजना का विरोध करते हुए बकस्वाहा जंगल को संरक्षित करने का आह्वान किया।
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इसके साथ ही उन्होंने यहां आबाद एक गांव को गोद लेने की भी घोषणा की। बुंदेलखंड के बकस्वाहा (छतरपुर) के हरे भरे जंगल को हीरा खदान में बदलने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने देश की मशहूर कंपनी बिरला ग्रुप की एक्शन माइनिंग इंडस्ट्रीज के हवाले कर दिया है। 2500 करोड़ में 50 साल का खनन पट्टा दे दिया है। कंपनी ने 382.13 हेक्टेयर का प्लान तैयार किया है। हीरा खदान के लिए इस जंगल के दो लाख से ज्यादा हरे-भरे पेड़ पौधों का सफाया हो सकता है। हीरा परियोजना से प्रभावित होने वाले बुंदेलखंड के ग्रामीणों समेत एमपी, यूपी और देश के कई राज्यों के पर्यावरण पैरोकार लगातार इसका विरोध कर रहे हैं। पर्यावरण प्रेमियों ने यहां तक चेतावनी दी है कि वह चिपको आंदोलन की तर्ज पर पेड़ों से चिपककर जंगल बचाएंगे।
विश्व पर्यावरण दिवस पर शनिवार को समर्थ सद्गुरु भइया जी के नाम से मशहूर पर्यावरण प्रेमी भी बकस्वाहा जंगल पहुंचे। उन्होंने यहां जंगल के बीच लोगों की जन पंचायत लगाई। जन पंचायत में बड़ी तादाद में ग्रामीण और जंगल की जंग लड़ रहे कार्यकर्ता भी उपस्थित थे। समर्थ सद्गुरु ने वन संपदा क्षेत्र में हीरा परियोजना को आत्मघाती कदम बताया। कहा कि वन अभ्यारणों में विकास के नाम पर हो रहे निर्माण और योजनाएं धर्म नीति के भी विरुद्ध हैं। उन्होंने इस क्षेत्र में बसे सगोरिया गांव को गोद लेने का भी भरोसा दिलाया।
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पर्यावरण दिवस पर आबाद रहा जंगल---
बकस्वाहा जंगल विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण प्रेमियों से आबाद रहा। विभिन्न संगठनों से जुड़े तथा पर्यावरण के पैरोकारों ने जंगल के पेड़ों में धागा बांधकर इनकी सुरक्षा का संकल्प लिया। साथ ही शाम को एक दीपक प्रकृति के नाम कार्यक्रम के तहत पेड़ों तले दीप जलाए।
हैलीपैड भी बनेगा बकस्वाहा में---
बकस्वाहा में हरे भरे जंगल और नदी नालों के कुदरती नजारों को नजर अंदाज कर प्रस्तावित हीरा खदान परियोजना में यहां हैलीपैड भी बनाने का प्रस्ताव है। बताया जा रहा कि 138.31 हेक्टेयर खदान का क्षेत्रफल होगा, जबकि परियोजना का कुल क्षेत्रफल 382.13 हेक्टेयर बताया गया है। कंपनी 50 साल तक यहां हीरा खुदवाएगी। बिरला ग्रुप को इसकी स्वीकृति वर्ष 2019 में ही मिल गई थी।
सरकार को 2.36 अरब मिलेंगे सालाना
बकस्वाहा हीरा खदान से सरकार को 50 साल में अलग-अलग मदों में कुल 23632.83 करोड़ रुपये मिलेंगे। इसके अलावा रायल्टी आदि में हर साल 472.65 करोड़ रुपये की आमद होगी।
सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी में याचिकाएं
बकस्वाहा जंगल का मामला सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी पहुंच गया है। याचिकाओं में हीरा खदान की अनुमति रद्द करने की मांग की गई है। समाज सेविका नेहा सिंह ने अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर की थी। इधर, नागरिक उपभोक्ता मार्ग दर्शक मंच के पीजी नाथ पांडेय और रजत भार्गव ने एनजीटी में याचिका दायर करके हजारों पेड़ कटने से होने वाले नुकसान की ओर एनजीटी का ध्यान आकर्षित करते हुए वन सलाहकार समिति गठित करने की मांग की है।
पर्यावरण को बचाने को 13 संगठनों ने छेड़ी मुहिम
बांदा। विश्व पर्यावरण दिवस पर आदर्श आईटीआई बागवान चैरिटेबल ट्रस्ट की दो पेड़ जिंदगी के लिए बैठक में बुंदेलखंड के 13 संगठनों ने कुटुंब बनाया। बढ़ते तापमान, प्रदूषण और ऑक्सीजन की कमी से बीमार लोगों के प्रति चिंता व्यक्त की गई। कोरोना से मरने वालों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार को दो पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया।
ट्रस्ट निदेशक पंकज बागवान ने कहा कि मानवीय गलतियों के कारण हमें वीभत्स बीमारियों से जूझना पड़ रहा है। इसके लिए पर्यावरण प्रदूषण, घटते वन, कटते पेड़ों से हवा में बढ़ती कार्बन डाईऑक्साइड, जल प्रदूषण बड़ा कारण है। प्रभुता फाउंडेशन की रजनी गुप्ता ने कहा कि तापमान को कम करने को हमें लोगों को जागरूक करना होगा। शैलेंद्र सिंह बुंदेला ने कहा कि सरकार पेड़ लगाने के लिए प्रति वर्ष लक्ष्य तय करती है, लेकिन इनका संरक्षण कैसे होगा विचार करना चाहिए। संजय निगम ने कहा कि बढ़ते तापमान एवं बढ़ते प्रदूषण ने हमारे प्राकृतिक चक्र को प्रभावित किया है। बक्स्वाहा हीरा खदान में काटे गए हजारों पेड़ों की निंदा की।
कहा कि हमें हीरे नहीं ऑक्सीजन चाहिए है। बुंदेलखंड कनेक्ट के समन्वयक अरुण निगम ने ट्रस्ट की पहल का स्वागत किया। कहा कि यह कुटुंब निश्चित ही पर्यावरण के प्रति जागरूक करने में सफल भूमिका निभाएगा। फिल्म डायरेक्टर प्रवीण चौहान से कहा कि वह छोटी-छोटी मूवी बनाकर लोगों को जागरूक करने में सहयोग करें। आदर्श आईटीआई के प्रबंधक प्रशांत चौहान ने सभी संगठनों से अभियान को सफल बनाने में सहयोग करने की अपील की। जादूगर आरसी योगा, गौरक्षा के जिला प्रभारी महेश प्रजापति, गौरव श्रीवास्तव, आकाश श्रीवास्तव सहित 13 संगठनों के स्वयंसेवी मौजूद रहे। (संवाद)

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