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बुंदेली किसानों को रास आया स्वैच्छिक फसल बीमा

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जलमग्न खेत दिखाता किसान। (फाइल फोटो) - फोटो : BANDA
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बांदा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की अनिवार्यता खत्म कर इसे स्वैच्छिक बनाए जाने के केंद्रीय कैबिनेट के फैसले को बुंदेलखंड के किसान अपने हित में मान रहे हैं। उनका कहना है कि बीमा कंपनियों ने बीमा के नाम पर किसानों को चपत ज्यादा और फायदा कम पहुंचाया है।
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योजना लागू होने के पिछले चार साल के अनुभव यही हैं। शायद यही वजह है कि बांदा समेत पूरे चित्रकूटधाम मंडल में मात्र 42 फीसदी किसानों ने ही फसल बीमा योजना में पंजीकरण कराया। इसमें भी अधिकांश संख्या बैंक से कर्ज लेने वाले किसानों की है। कर्ज लेने पर फसल बीमा अनिवार्य है। बीमा कराने वाले गैर कर्जदार किसान बमुश्किल 10 फीसदी से ज्यादा नहीं हैं।
2016 में लागू हुई थी योजना
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) 13 जनवरी 2016 को लागू हुई थी। इसके तहत किसानों को खरीफ फसल में 2 फीसदी और रबी में डेढ़ फीसदी प्रीमियम देना होता है। वाणिज्यिक या बागवानी फसलों में प्रीमियम पांच फीसदी लगता है।
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इस योजना का लाभ ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से खेती को हुए नुकसान पर दिया जाता है, जिसे टाला नहीं जा सकता। बुवाई से पहले और कटाई के बाद फसल बीमा सुरक्षा दी जाती है। निर्धारण फसल की कटाई (क्राप कटिंग) पर निर्भर है। किसान ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों ही तरीके से बैंक में आवेदन कर सकते हैं।
बजाज अलियांज है बीमा कंपनी
बांदा। जिले में फसल बीमा का काम बजाज अलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को सौंपा गया है। चित्रकूटधाम मंडल में इस कंपनी के प्रतिनिधि रूपेश कुमार हैं। बांदा में जौ, चना, अलसी, मसूर, सरसों, मटर और गेहूं फसल बीमा योजना में अधिसूचित/शामिल हैं।
बीमा के लाभ की शर्तें
अधिसूचित क्षेत्र में प्रतिकूल मौसम होने से फसल की बुवाई न कर पाना या बुवाई नाकाम होना, बुवाई से कटाई के बीच खड़ी फसल के दौरान प्राकृतिक आपदा सूखा, बाढ़, जलभराव, ओला, भूस्खलन, प्राकृतिक आग या आकाशीय बिजली, तूफान, चक्रवात व अन्य रोके न जा सकने वाले जोखिमों जैसे रोगों कीटों (कृमियों) आदि से फसल को नुकसान।
व्यक्तिगत बीमा में खड़ी फसल को आकाशीय बिजली, बादल फटने, ओलावृष्टि, भूस्खलन, जलभराव की स्थिति होने पर बीमा का लाभ मिलेगा। इसमें फसल कटाई के बाद 14 दिनों तक खेत में सूखने के लिए रखी गई कटी फसल को ओलावृष्टि या बेमौसम की बारिश अथवा चक्रवात से नुकसान पहुंचना भी शामिल है।
बीमा की पात्रता/शर्तें
वे सभी किसान जिनके लिए खरीफ फसलों की आखिरी तारीख तक किसी भी सहकारी/ग्रामीण/वाणिज्यिक बैंक से फसल ऋण मंजूर किया गया हो। इसके अलावा गैर कर्जदार किसानों में अधिसूचित फसल उगाने वाले किसान, खुद के नाम पर उनकी भूमि के अभिलेख हों और चालू हालत में बचत बैंक खाता हो।
बांदा जिले में किसानों द्वारा अदा की गई फसल बीमा की प्रीमियम (प्रति हेक्टेयर रुपये)
फसल बीमित रकम किसान की प्रीमियम
जौ 30440 456.60
चना 29,400 441
अलसी 32,634 489.51
मसूर 28,500 427.50
सरसों 24,900 373.5
मटर 31,800 477
गेहूं 47,900 718.50
छह बीघे का काश्तकार हूं। दो साल लगातार धान की फसल का बीमा कराया। हर साल 1300 रुपये प्रीमियम लिया गया। पिछले वर्ष अतिवृष्टि में डेढ़ बीघा धान की फसल खराब हो गई। कंपनी ने बीमा नहीं दिया। बैंक के चक्कर लगाता रहा। स्वैच्छिक हो जाने से अब बीमा के झंझट से निजात मिलेगी।-रामगोपाल प्रजापति, तिंदवारी।
केसीसी से कर्ज लेने पर तीन साल से लगातार गेहूं का बीमा किया जा रहा था। हर वर्ष करीब 1500 रुपये प्रीमियम जमा कराया जाता था। 2019 में ओलावृष्टि से फसल को नुकसान हुआ, लेकिन बीमा का लाभ नहीं मिला। अब सरकार ने छूट दे दी है। मैं बीमा नहीं कराऊंगा। बीमा कंपनियां ही फायदा उठाती हैं। -किसान महेंद्र सिंह, कल्यानपुर, नरैनी।
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