बांदा वन विभाग द्वारा पौध रोपण के लिए तैयार की जा रही नर्सरी।
- फोटो : amar ujala
बांदा। बुंदेलखंड में हरित क्रांति के नाम पर पिछले तीन दशकों में केंद्र और राज्य सरकारें तकरीबन 300 अरब रुपये पौध रोपण इत्यादि पर खर्च कर चुकी हैं। लगभग हर सरकार में यहां पौध रोपण के बड़े अभियान चलाए गए। उन सबका क्या हश्र हुआ? इसकी परवाह किए बगैर प्रदेश सरकार ने अबकी फिर बुंदेलखंड में एक करोड़ 44 लाख 40 हजार 807 पौध रोपने का लक्ष्य निर्धारित करके खाका तैयार किया है। पूरे प्रदेश में इस बारिश में 22 करोड़ पौधे रोपे जाएंगे। इसमें बुंदेलखंड की हिस्सेदारी साढ़े 6 फीसदी है।
राष्ट्रीय वन नीति के तहत कुछ क्षेत्रफल में 33 फीसदी वन होना चाहिए। लेकिन बुंदेलखंड में यह नीति पूरी तरह फ्लॉप है। पौध रोपण के तमाम अभियानों के बाद भी बुंदेलखंड में वन क्षेत्र का औसत मात्र 7.44 फीसदी है। सातों जनपदों में कहीं भी वन क्षेत्र का मानक पूरा नहीं है।
अब एक बार फिर बुंदेलखंड का हरा भरा बनाने की योजना प्रदेश सरकार ने तैयार की है। अबकी बारिश में पूरे प्रदेश में 22 करोड़ और बुंदेलखंड के सातों जिलों में एक करोड़ 44 लाख 40 हजार 807 पौध रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसकी तैयार की गई योजना में लगभग दो दर्जन विभागों को पौध रोपण के अलग-अलग लक्ष्य दिए गए हैं। सबसे ज्यादा पौध रोपण वन विभाग कराएगा। झांसी मंडल में कुल 67,70,305 पौध रोपे जाएंगे। चित्रकूटधाम मंडल में 76,70,502 पौध रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।