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Banda News: बारिश से ढहे मकान में दबकर भाई-बहन की मौत, सात गंभीर

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जिला अस्पताल में परिजनों से हालचाल लेतीं जिलाधिकारी जे. रीभा। - फोटो : संवाद
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अतर्रा/ओरन (बांदा)। बारिश से ईंट-गारे से बना मकान बृहस्पतिवार की रात पौने तीन बजे भरभराकर गिर गया। इसमें दो भाइयों का परिवार दब गया। इस हादसे में भाई-बहन की मौत हो गई जबकि सात लोग घायल हो गए। घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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बिसंडा थाना क्षेत्र के ओरन ग्रामीण के मजरा पिपरीखेरवा निवासी मनोज सिंह ने बताया कि भाई सुनील सिंह और अमर सिंह का परिवार मकान में बनी लंबी चौपार में चारपाई डालकर सो रहा था। रात करीब पौने तीन बजे बारिश की वजह से पूरा मकान भरभराकर ढह गया। सुनील कुशवाहा (35), पत्नी विमला (30), बच्चे पुष्पेंद्र (7), आरोही (5), गोलू (3), और भाई अमर सिंह की पत्नी मंदाकिनी (28), पुत्र दिव्यांशु (12), प्रतिभा (7) व मां चंद्रप्रभा (62) मलबे में दब गए।
चीख पुकार से नींद खुली तो मकान की ओर दौड़े। ग्रामीणों के सहयोग से मलबे से बाहर निकाला। सूचना पर यूपी-112 पुलिस, बिसंडा थाना पुलिस और एंबुलेंस भी पहुंच गई। घायलों को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों ने पुष्पेंद्र और आरोही को मृत घोषित कर दिया। अन्य का इलाज किया। जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी जे.रीभा भी सुबह नौ बजे अस्पताल पहुंचीं। घायलों का हालचाल लेकर बेहतर इलाज की व्यवस्था की।
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उधर, मौके पर एसडीएम अतर्रा राहुल द्विवेदी, तहसीलदार दीपेंद्र सिंह, प्रधान कुल्लू प्रसाद, लेखपाल प्रणदेव त्रिपाठी, एडीओ पंचायत अनिल सिंह भी पहुंचे। उन्होंने नुकसान का आंकलन कर मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया।


वर्जन
बारिश से मकान गिरने से नौ लोग दब गए। दो बच्चों की मौत हो गई। घायलों का जिला अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। -सौरभ सिंह
क्षेत्राधिकारी, बबेरू।

साइड स्टोरी :

तेज धमाके के साथ मकान के मलबे में समा गया परिवार
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। बड़े भाई मनोज कुशवाहा ने बताया कि वह पांच भाई हैं। उसके अलावा अमर सिंह, सुनील कुशवाहा, हीरालाल कुशवाहा और नंदलाल। एक ही मकान में सभी के हिस्से हैं। वह मकान के पिछले हिस्से में सो रहे थे। उसका परिवार भी वहीं सोया था। रात में बिजली नहीं थी। बारिश हो रही थी। अचानक तेज धमाके में नींद खुली तो चीख पुकार सुनाई पड़ी।
वह पैतृक मकान की ओर से भागा तो देखा पूरा मकान मलबे के ढेर में तब्दील हो चुका है। उसके अपने मलबे में दबे मदद के लिए पुकार रहे थे। आनन-फानन में गांव वालों को मदद के लिए पुकारा। कुछ ही देर में लोग आ गए और मलबे में दबे लोगों को निकालकर पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। सुबह करीब चार बजे घायलों को लेकर जिला अस्पताल में पहुंचे।

तीन साल पहले हुआ था बंटवारा
ओरन (बांदा)। पांचों भाइयों का तीन साल पहले बंटवारा हुआ था। पिता छेदीलाल की वर्ष 2022 में हार्ट अटैक से मौत हो चुकी है। सिर्फ मां चंद्रप्रभा हैं। सभी के हिस्से में डेढ़-डेढ़ बीघा जमीन हैं। सुनील कर्नाटक में रहकर पल्लेदारी का काम करता है।
वह गुरुवार को ही घर आया था। अमर सिंह रायपुर में लोहा फैक्टरी में मजदूरी करता है। घटना के समय घर पर नहीं था। उसको सूचना दी गई है वहां से चल दिया है। मनोज ने बताया कि सभी ने प्रधानमंत्री आवास के लिए आवेदन किया था। आवास किसी को नहीं मिले, किसी के पास जॉबकार्ड भी नहीं हैं। सरकारी सहायता में सिर्फ सफेद राशन कार्ड हैं, जो जीविकोपार्जन का सहारा है।
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