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सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के नए आदेशों पर मंथन

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Brainstorming on new orders of Supreme Court and High Court - फोटो : BANDA
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बांदा। न्यायिक प्रक्रियाओं और निर्णयों में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के नए दिशा-निर्देशों और व्यवहारिक रूप से आने वाली अड़चनों को लेकर चित्रकूटधाम मंडल के न्यायिक अधिकारियों ने एक साथ बैठकर चर्चा की। सीनियर जजों ने जूनियर न्यायिक अधिकारियों को जानकारियां दीं। अंतरिम जमानत, किशोर अपराधी, स्थगन आदेश इत्यादि के मुद्दे छाए रहे।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर उत्तर प्रदेश न्यायिक प्रशिक्षण अनुसंधान, लखनऊ के तत्वावधान में रविवार को यहां कृषि विश्वविद्यालय के कांफ्रेंसिंग हॉल में मंडल स्तरीय प्रशिक्षण/कार्यशाला हुई। चारों जिलों बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और महोबा के जनपद न्यायाधीशों सहित इन जिलों के सभी न्यायिक अधिकारी उपस्थित थे। लगभग पूरा दिन चले प्रशिक्षण में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट द्वारा लागू किए गए नए दिशा-निर्देशों और आदेशों पर खास चर्चा हुई। बताया गया कि उत्तर प्रदेश में अंतरिम जमानत पर लगी रोक अब खत्म हो गई है। अब गिरफ्तारी के पूर्व दी जाने वाली जमानत पर क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी? किशोर अपराधी की आयु का निर्धारण कैसे होगा? किशोर आरोपियों को किसकी कस्टडी में सौंपा जाएगा? इत्यादि पर जानकारियां दी गईं। हाल ही में नियुक्त हुए जूनियर्स जजों के सवालों और जिज्ञासाओं पर सीनियर्स न्यायिक अधिकारियों ने जवाब दिए। बांदा के सिविल जज सीनियर डिवीजन अभिषेक व्यास और भारतेंदु गुप्ता ने नई विधि-व्यवस्थाओं के बारे में बताया।
प्रशिक्षण में जनपद न्यायाधीश राधेश्याम यादव (बांदा), मोहम्मद असलम (हमीरपुर), रामपाल सिंह (चित्रकूट) और गुलाब सिंह (महोबा) सहित प्रशिक्षण के नोडल अधिकारी/एडीजे पवन कुमार शर्मा सहित नए न्यायिक अधिकारी नितिन सिंह, अनुजा, कुमारी शालिनी, कुमारी सौम्या मिश्रा, कुमारी मनीषा साहू ने भी शैक्षणिक योगदान दिया। अंत में एडीजे प्रथम (बांदा) बीके सैलट ने सभी का आभार जताया। संचालन एडीजे बांदा ऋषि कुमार ने किया।
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