Booking of Eid clothes stopped, artisans raised their hands
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बांदा। कोरोना के दो वर्ष तक सामूहिक रूप से ईद नहीं मनाई जा सकी। अबकी मौका मिला है तो जोश भी दोगुना है। ईद की जमकर खरीदारी हुई है। सबसे ज्यादा व्यापार कपड़ों का हुआ। स्थिति यह हो गई है कि टेलर अब कपड़े सिलने को तैयार नहीं है। उन्होंने बुकिंग बंद कर दी है। ईद के साथ ही शादी की भी इन दिनों सहालग है। ऐसे में वह परिवार परेशान हैं जो अंतिम दिनों में कपड़े के लिए पैसे का इंतजाम कर सके। उनके कपड़े नहीं सिल पा रहे। रात-दिन टेलरिंग दुकानों में सिलाई का काम जारी है।
नए कपड़ों के सिलाई रेट भी महंगाई की मार से अछूते नहीं रहे। प्रकाश टाकीज कैंपस में स्थित मशहूर टेलरिंग शॉप संचालक जियाउद्दीन ने बताया कि पिछले 10 दिनों पूर्व ही उसने सिलाई के लिए नए कपड़ों की बुकिंग बंद कर दी थी। कई कारीगरों की जमात रात-दिन काम कर रही है। इसके बाद भी अभी काम निपट नहीं पा रहा। चांद रात तक ग्राहकों के कपडे़ तैयार हो पाएंगे। ईद के साथ सहालग का भी दबाव है। उधर, ग्राहकों को साधारण कुर्ता-पायजामा और पैंट-शर्ट के लिए 650 रुपये और पठानी शूट के लिए 600 रुपये सिलाई देना पड़ रहा है। ईद में कुर्ता-पायजामा ही ज्यादा सिले जा रहे हैं।
सहालग में कोट-पैंट की सिलाई तीन हजार रुपये हो गई है। सदरी के 1200 रुपये और साधारण कुर्ता 350 रुपये में सिल रहा है। शहर के मशहूर कपड़ा व्यवसायी और टेलर वसीम अहमद ने बताया कि कारीगरों पर इन दिनों काफी दबाव है। ईद से पहले ही कपड़े देना है। उधर, सहालग का भी काम काफी है। कारीगर कुछ घंटे ही आराम कर पा रहे हैं।