बबेरू (बांदा)। मरका थाना क्षेत्र के गुजेनी गांव में बहा नाला पार करते समय डूबकर चाची-भतीजे समेत तीन की मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।
ग्रामीणों और परिजन ने पुल व सड़क बनवाने की मांग को लेकर तीनों शव रातभर नहीं उठने दिए। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के जल्द पुल बनवाने के आश्वासन के बाद बुधवार सुबह करीब 11 बजे पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
गुजेनी गांव निवासी रामखेलावन अपनी पत्नी कुसुमरानी (30), भतीजे कोमल (27) पुत्र छोटेलाल और सिया (50) पत्नी फूलचंद्र मंगलवार शाम खेतों में खाद डालकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान बहा नाला पार करते समय चारों पानी के तेज बहाव में बह गए।
हादसे में कोमल, कुसुमरानी और सिया की मौत हो गई जबकि रामखेलावन किसी तरह बच गए थे। एक साथ तीन मौतों की खबर से गांव में मातम छा गया। घटना के बाद गांव में किसी घर में चूल्हा तक नहीं जला।
उधर, तीनों शवों को एक स्थान पर रखा गया। परिजन और ग्रामीणों ने कहा कि जब तक बहा नाले पर पुल और सड़क नहीं बनती, तब तक शव नहीं उठाए जाएंगे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी रातभर परिजन को समझाते रहे लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे। सीओ कृष्णकांत त्रिपाठी और नायब तहसीलदार राहुल गौरव भी मौके पर पहुंचे लेकिन सहमति नहीं बन सकी।
बुधवार सुबह जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह पटेल, भाजपा नेता अजय सिंह पटेल, ब्लॉक प्रमुख रमाकांत पटेल, जिला पंचायत सदस्य इंद्रजीत यादव, तहसीलदार मनोहर सिंह, एसडीएम अवनीश कुमार त्यागी, बीडीओ अभिषेक चौधरी और क्षेत्रीय विधायक विशंभर सिंह यादव गांव पहुंचे। सभी ने ग्रामीणों को जल्द सड़क और पुल बनवाने का आश्वासन दिया।
विधायक ने जिलाधिकारी अमित आसेरी से फोन पर वार्ता की। जिलाधिकारी ने जल्द प्रस्ताव बनाकर भेजने के निर्देश दिए। इसके बाद परिजन शव उठाने के लिए राजी हुए। थाना प्रभारी मरका सूबेदार बिंद ने पुलिस टीम के साथ तीनों शवों को सुबह करीब 11 बजे जिला मुख्यालय पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
कई गांवों को जोड़ता है रास्ता, बरसात में दलदल बन जाती है सड़क
गांव के शारदा प्रसाद, रामनेवाज, यदुराज सिंह, गजराज, लालमन और रामगोपाल ने बताया कि बहा नाला पर पुल और सड़क बनवाने के लिए अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को कई बार शिकायती पत्र दिए जा चुके हैं। गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर बहा नाला पर पुल बनने से पारा, भाटी और बंभरौला समेत कई गांव सीधे जुड़ जाएंगे। बरसात में कच्चा मार्ग दलदल में तब्दील हो जाता है। ग्रामीण इसी रास्ते से नाला पार कर खेतों तक पहुंचते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी यहां कई हादसे हो चुके हैं लेकिन प्रशासन ने स्थायी समाधान नहीं कराया।
चारपाई के सहारे चार घंटे में शव गांव लाए
घटनास्थल गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर है। कच्चे और दलदली रास्ते के कारण शवों को गांव तक लाना भी परिजन और पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना। मरका थाना प्रभारी सूबेदार बिंद और पुलिस टीम ग्रामीणों के साथ चारपाई के सहारे पैदल शव लेकर करीब चार घंटे बाद गांव पहुंची। शव घर पहुंचते ही परिजन में चीख-पुकार मच गई।
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हर बारिश में जिंदगी को दांव पर लगा खेती करते हैं गुजेनी के किसान
बांदा। गांव गुजेनी के अधिकांश किसान हर बरसात में अपने जीवन को खतरे में डालकर खेती करने जाते हैं। वह पिछले कई साल से प्रशासन से एक छोटे से पुल की मांग कर रहे हैं। जिसे अब तक पूरा नहीं किया जा सका है।
तहसील बबेरू के थाना मरका क्षेत्र के गांव गुजैनी की आबादी करीब 2500 है। यहां के अधिकांश लोगों के खेत बहा नाला के पार स्थित हैं। बरसात के अलावा अन्य महीनों में नाले में पानी न के बराबर होता है। ऐसे में गांव के किसान अपने घरों से निकलकर करीब पांच किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए नाले को पार कर जाते हैं और कृषि कार्य करके वापस चले जाते हैं।
वर्तमान समय में बरसात के कारण नाले में पानी का बहाव अधिक हो गया है। गांव के लोगों ने बताया कि वर्तमान में नाले का पानी 200 फीट के दायरे में फैल गया है। बहाव बहुत ही तेज है। इससे पैदल पार नहीं किया जा सकता है।
करीब 20 किमी का लगाना पड़ेगा चक्कर
बांदा। ग्रामीणों ने बताया कि नाले में बाढ़ आने के कारण रास्ता बंद हो चुका है। अब ग्रामीण अपने खेतों पर जाने के लिए भमरौला और भाटी गांव की ओर से घूमकर अपने खेतों पर पहुंचेंगे। इसके लिए अब उन्हें करीब 20 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ेगा।
दस किमी आना और दस किमी वापस आना। नाले से होकर जाने पर यह दूरी आधी हो जाती है। बताया कि वर्ष 2025 में गुजेनी निवासी जयकरन और ददुवा बाढ़ के पानी में फंसकर डूबने लगे थे।
वहां मौजूद दूसरे ग्रामीणों ने उन्हें बचाया था। इसके बाद ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पुल बनाने के लिए मांग की है और पत्र भी दिया था। शासन से फाइल स्वीकृत नहीं होने पर यह मामला रुक गया था। (संवाद)
कोमल के बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
बांदा। नाले में डूबने से हुए हादसे ने तीन परिवारों की हंसती-खेलते जीवन को बिखेर दिया है। कुसुमरानी के दो बच्चे प्रांशु और हिमांशु अब अपनी मां को दोबारा नहीं देख पाएंगे। इसी तरह से सिया का बेटे रामकरन को भी अपनी मां के जाने का गम बर्दाश्त नहीं हो रहा था। हादसे में जान गंवाने वाले कुसुमरानी के भतीजे कोमल के बच्चों का अब कोई सहारा नहीं रहा। कोमल की पत्नी सुनीता, दो बेटियां लक्ष्मी, श्रद्धा, और एक बेटा है। (संवाद)
फोटो-10-ग्रामीणों को समझाने का प्रयास करते जनप्रतिनिधि व पुलिस। संवाद
फोटो-10-ग्रामीणों को समझाने का प्रयास करते जनप्रतिनिधि व पुलिस। संवाद
फोटो-10-ग्रामीणों को समझाने का प्रयास करते जनप्रतिनिधि व पुलिस। संवाद
फोटो-10-ग्रामीणों को समझाने का प्रयास करते जनप्रतिनिधि व पुलिस। संवाद