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खूब लड़ी भाजपा, साइकिल-हाथी भी दौड़े

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बांदा। जिले के मतदाताओं ने पुराने ढर्रे और सोच पर ही अबकी भी विधानसभा में अपना प्रतिनिधि भेजने के लिए वोट डाले। चारों विधानसभा क्षेत्रों में जातिगत समीकरण हावी रहे। कमोवेश एक जैसी स्थिति रही। मतदान का अधिकांश वोट भाजपा, सपा और बसपा के खाते में गया।
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सदर सीट पर मौजूदा भाजपा विधायक प्रकाश द्विवेदी और तिंदवारी सीट से मौजूदा विधायक बृजेश प्रजापति को 19वीं विधानसभा में पहुंचने या न पहुंचने का फैसला ईवीएम में लॉक हो गया है। दो अन्य सीटों पर दो पूर्व विधायकों विशंभर सिंह यादव (बबेरू) और गयाचरन दिनकर (नरैनी) की साख दांव पर लगी हुई है।
बांदा सदर सीट
सदर सीट में मुख्य दारोमदार शहर के मतदाताओं का होता है। आमतौर पर शहरी मतदाता भाजपा के प्रति रुझान रखते हैं, लेकिन यहां भी जातियों की पालाबंदी है। शहर में ब्राह्मण, ठाकुर, मुस्लिम, वैश्य, अनुसूचित जाति, कायस्थ सहित अन्य जातियों के मतदाता हैं।
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मतदान के रुझान के मुताबिक यहां भाजपा और सपा तथा बसपा के बीच काफी कांटे का मुकाबला हुआ है। चर्चाओं में भाजपा का पलड़ा भारी बताया जा रहा है। मुस्लिम वोट ज्यादातर सपा के खाते में गया है। कुछ मुस्लिम वोट बसपा और कांग्रेस ने हथियाए हैं।
तिंदवारी सीट
इस सीट पर ठाकुर और ओबीसी के बीच हमेशा पालाबंदी रही है। ज्यादातर ओबीसी प्रत्याशियों को ही सफलता मिली है। अबकी भी कमोवेश यही स्थिति है। भाजपा और सपा के प्रत्याशी ओबीसी वर्ग से हैं, जबकि बसपा ने क्षत्रिय प्रत्याशी को उतारा है।
सपा प्रत्याशी यहां से मौजूदा विधायक हैं। बसपा प्रत्याशी और उनकी पत्नी इसी क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य रही हैं, जबकि भाजपा प्रत्याशी यहां पूर्व में किसी चुनाव में नहीं उतरे हैं। लेकिन जातिगत समीकरण से भाजपा प्रत्याशी का पलड़ा भारी होने की चर्चा है। हालांकि बसपा और सपा को भी कम नहीं आंका जा रहा।
बबेरू सीट
बबेरू भी पिछड़ा वर्ग बाहुल्य सीट मानी जाती है। यहां भी ज्यादातर पिछड़े वर्ग से ही विधायक हुए हैं। कई दशकों से यहां इन्हीं का कब्जा रहा है। अबकी बार भी सपा ने यहां काफी दमदारी से चुनाव लड़ा है। हालांकि भाजपा प्रत्याशी भी इसी क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं। वर्ष 2012 में विधानसभा का चुनाव भी यहीं से लड़ा था। मतदान के बाद चर्चा है कि मुकाबला सपा और भाजपा के बीच सिमटेगा। हालांकि बसपा से एकलौते ब्राह्मण प्रत्याशी भी परंपरागत वोट बैंक पर भारी पड़ेंगे।
नरैनी सीट
नरैनी अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित सीट है। मतदाताओं के जातीय समीकरण में यहां अनुसूचित जाति के वोटरों का पलड़ा भारी है। ब्राह्मण भी खासी तादाद में हैं। माना जा रहा है कि अनुसूचित जाति में रैदास वर्ग का वोट बसपा के पाले में गया है, लेकिन कोरी मतदाता बसपा को शायद नहीं मिलेगा, क्योंकि भाजपा प्रत्याशी और कांग्रेस प्रत्याशी कोरी समाज से हैं। मुस्लिमों की भी काफी तादाद है। यह सपा, बसपा और कांग्रेस में बंटे हैं। भाजपा का यहां क्षत्रिय, ब्राह्मण, राजपूत, निषाद आदि के वोट मिलने की उम्मीद के साथ पलड़ा भारी माना जा रहा है।
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