फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिना परीक्षा दिए 17,349 परीक्षार्थी होंगे पास

विज्ञापन
विज्ञापन
बांदा। जनपद में 17,349 इंटरमीडिएट यूपी बोर्ड परीक्षार्थियों में अगली कक्षा में बिना परीक्षा दिए प्रमोट करने से खुशी है। 12वीं की परीक्षा देने का संशय अब समाप्त हो गया। शासन के फैसले अब यह परीक्षार्थी भी हाईस्कूल के परीक्षार्थियों की तर्ज पर अगली कक्षा के लिए प्रमोट कर दिए जाएंगे।
विज्ञापन

हालांकि, कक्षा 11 के टॉपर रहे परीक्षार्थियों में इस फैसले को लेकर मायूसी है। उधर, प्रधानाचार्य भी शासन के इस निर्णय को स्वीकार तो कर रहे हैं, पर मेधावियों के लिए नुकसान बता रहे हैं। इस वर्ष इंटरमीडिएट यूपी बोर्ड परीक्षा में 9659 छात्र व 7690 छात्राएं हैं। इनमें 748 व्यक्तिगत परीक्षार्थी भी शामिल हैं। इन सभी के डिग्री कक्षाओं में प्रवेश का रास्ता साफ है। शासन के आदेश पर माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज ने इन परीक्षार्थियों को प्री बोर्ड परीक्षा के अंक के आधार पर प्रमोट करने का निर्णय कर सकती है। जिन परीक्षार्थियों के अंक उपलब्ध नहीं होंगे, उन्हें सामान्य रू प से प्रमोट किया जा सकता है। अर्थात जिस छात्र ने प्री बोर्ड परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन किया है, उसे उसी आधार पर इंटरमीडिएट की परीक्षा में अंक मिलेंगे।
कोविड-19 के मद्देनजर सरकार ने इंटरमीडिएट की परीक्षा स्थगित करने का निर्णय लिया है। यह सही निर्णय है। परीक्षा होने बच्चों में कोरोना फैलने का खतरा था, क्योंकि बच्चों का अभी टीकाकरण नहीं हुआ है। अगर परीक्षाएं होतीं तो कई छात्र-छात्राएं संक्रमण का शिकार हो सकते थे। शासन के आदेश का अनुपालन किया जाएगा। मेधावी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन अगली कक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं में कर सकते हैं।
विज्ञापन

-रंजना सिंह, प्रधानाचार्य, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, तिंदवारी।
शासन द्वारा 12वीं की परीक्षा रद्द करने के फैसले से मेधावी बच्चों का नुकसान है। बहुत से बच्चों ने परीक्षा की तैयारी की थी। अब वह सामान्य बच्चों की तरह पास कर दिए जाएंगे। परीक्षा कराने का निर्णय सही था। अब जो शासन का निर्णय आएगा उसका पालन किया जाएगा।
-मेजर मिथिलेश कुमार पांडेय, प्रधानाचार्य, आदर्श बजरंग इंटर कॉलेज, बांदा।
12वीं की छात्रा श्रद्धा त्रिपाठी (स्वरूप नगर) ने कहा कि कक्षा 11 में उसके 88 प्रतिशत अंक आए थे। 12वीं की परीक्षा के लिए उसने नियमित रूप से छह से 8 घंटे पढ़ाई की थी। परीक्षा होती तो बेहतर अंक वह लाती। पर कोरोना को लेकर शासन ने परीक्षा रद्द कर दी है। इससे वह मायूस है, पर शासन का निर्णय सही है।
परीक्षा होती तो बेहतर होता
12वीं के छात्र मोनिस (तिंदवारी) ने बताया कि उसने कक्षा 11 में 70 फीसदी अंक हासिल किए थे। 12वीं की परीक्षा की तैयारी भी जोरों पर कर रहे थे। पहले फैसला आया कि परीक्षा होगी, पर पैटर्न चेंज होगा। अब रद्द का आदेश आया है। परीक्षा होती तो बेहतर होता। सामान्य छात्रों के साथ पास होना खल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें