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Banda News: पर्यटकों के लिए 10 करोड़ से विकसित होगा भूरागढ़ दुर्ग

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बांदा। ऐतिहासिक भूरागढ़ दुर्ग अब पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण का केंद्र होगा। यहां 4.86 करोड़ की लागत से केन रिवर फ्रंट बनेगा। वहीं दुर्ग में पर्यटकों के लिए टाॅयलेट ब्लाक, पार्किंग, फव्वारा, लाइटिंग के साथ चिड़ियाघर भी बनाने की तैयारी है। शासन ने इस कार्य के लिए करीब 10 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इसमें से पहली किस्त में पांच करोड़ रुपये आवंटित हो चुके हैं।
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भूरागढ़ दुर्ग में सैकड़ों क्रांतिकारियों को अंग्रेजों ने फंदे पर लटका दिया था। इसमें शहादत स्थल आज भी बने हैं। दुर्ग की बनावट चंदेल कालीन है। केन नदी के तट पर शहर के ऊपरी हिस्से पर भूरागढ़ दुर्ग स्थित है। शासन-प्रशासन की उपेक्षा के चलते यह धीरे-धीरे वजूद को खोने लगा था। शासन ने इधर, बुंदेली विरासत को सहेजने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए। भूरागढ़ दुर्ग को पर्यटन स्थल घोषित किया गया। इसके बाद यहां पर्यटन विकास के कार्य भी शुरू करा दिए गए।
पर्यटन विभाग दुर्ग को संजाने-संवारने में करीब 10 करोड़ रुपये खर्च करेगा। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अनुपम श्रीवास्तव के मुताबिक भूरागढ़ दुर्ग में केन नदी पर रिवर फ्रंट बनाया जा रहा है। इसके लिए 4.86 करोड़ रुपये शासन ने स्वीकृत किए हैं। इसके तहत नदी में आकर्षक घाट और लाइटिंग की व्यवस्था होगी, जो पर्यटकों को आकर्षित करेगी। उधर, भूरागढ़ दुर्ग में ही टॉयलेट ब्लाक बनाए जा रहे हैं। वाहन पार्किंग स्टैंड, चारों तरफ बाउंड्रीवाल व नाला बनाने की तैयारी है। नाला के ऊपर लाल पत्थर से आकर्षक डिजाइन बनाई जाएगी। इसके अलावा यहां चिड़ियाघर भी बनाने की तैयारी है। इन कार्यों में करीब 4.65 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पर्यटन विभाग ने लखनऊ की सिंह कांट्रक्शन संस्था को कार्य की जिम्मेदारी सौंपी है। करीब एक वर्ष बाद यह पर्यटन स्थल देसी-विदेशी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा। इसे बुंदेलखंड एक्सप्रेस से भी सीधे जोड़ा रहा है।
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बुंदेली वीरता का गवाह है भूरागढ़ दुर्ग

बांदा। महाराजा छत्रसाल के पुत्रों बुंदेला हृदय शाह और जगत राय से किले का इतिहास जुड़ा हुआ है। जगत राय के पुत्र कीरत सिंह ने सन् 1787 तक यहां राज्य किया। इसके बाद अली बहादुर प्रथम ने यहां की सत्ता संभाली थी। लंबे समय तक यह किला नवाबों के अधीन रहा। ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ महान स्वतंत्रता संग्राम 14 जून 1857 को हुआ है। युद्ध का नेतृत्व बांदा में अली बहादुर द्वितीय ने भूरागढ़ किले से किया। अंग्रेजों के खिलाफ इस लड़ाई में कानपुर, इलाहाबाद और बिहार के क्रांतिकारी भी शामिल हुए। पांच जून 1857 को क्रांतिकारियों ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कॉकरेल की हत्या कर दी। अंग्रेजों की अदालत में क्रांतिकारियों को काले पानी और मृत्यु दंड की सजा सुनाई गई। युद्ध में अली बहादुर द्वितीय को शहादत देनी पड़ी। यहां जांबाज क्रांतिकारियों की मजारें आज भी बनी हैं। मकर संक्रांति में यहां दो दिवसीय नटबली का मेला लगता है।

-भूरागढ़ दुर्ग में पर्यटन विकास के कार्य कराए जा रहे हैं। शासन की मंशा के अनुरूप यहां सभी कार्य कराए जा रहे हैं। अभी दस करोड़ स्वीकृत हुए हैं। आगे कार्य के हिसाब से बजट की और मांग की जाएगी।
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-अनुपम श्रीवास्तव, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी, चित्रकूटधाम मंडल, बांदा
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