बांदा। चित्रकूटधाम मंडल को कुपोषण से निजात नहीं मिल रही है। मंडल मुख्यालय बांदा इसमें टॉप पर है। कुपोषण की रोकथाम के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की चल रही कई योजनाओं के बावजूद बुंदेलखंड का चित्रकूटधाम मंडल क्षेत्र अभी भी कुपोषण के शिकंजे में है। चारों जिलों में 18,348 बच्चे कुपोषित हैं। इनमें 3550 बच्चे अति कुपोषित (सैम) श्रेणी में हैं। बांदा जिले में सर्वाधिक 9602 बच्चों को कुपोषण ने घेर रखा है। इनमें 1786 अति कुपोषित हैं। इन पर लगातार नजर रखी जा रही है और इलाज हो रहा है।
आमतौर पर गरीबी और पौष्टिक आहार/भोजन न मिल पाने से बच्चों को कुपोषण रोग अपनी गिरफ्त में लेता है। पीड़ित बच्चे सेहतमंद नहीं हो पाते। अक्सर तो उनकी जान को खतरा पैदा हो जाता है। शरीर के महत्वपूर्ण अंग निष्क्रिय हो सकते हैं। ऐसे बच्चों को विटामिन, कैल्शियम, आयरन, वसा, कार्बोहाइड्रेट और पोषण तत्वों से भरपूर संतुलित आहार दिया जाना अनिवार्य है।
पोषण अभियान के नोडल विभाग बाल विकास एवं पुष्टाहार के आंकड़ों के मुताबिक मंडल के चारों जिलों में कुल 18,348 कुपोषित बच्चे हैं। इनमें 3550 अति कुपोषित (सैम) और 14,798 कुपोषित (मैम) श्रेणी में हैं। जनपदवार तुलना में बांदा में सबसे ज्यादा कुपोषण का शिकंजा है। यहां 7816 कुपोषित और 1786 अति कुपोषित बच्चे हैं। मंडल के अन्य जिलों की तुलना में यह सबसे ज्यादा है।
कुपोषित, अति कुपोषित बच्चों का ब्योरा
जिला कुपोषित अति कुपोषित योग
बांदा 7816 1786 9602
चित्रकूट 1944 736 2670
हमीरपुर 8188 321 2509
महोबा 2850 717 3567
मंडल योग 14,798 3550 18,348
स्वास्थ्य केंद्रों में 13,048 कुपोषित बच्चों का इलाज
चिह्नित कुपोषित बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर स्वास्थ्य प्रबंधन भी किया जा रहा है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक मंडल में कुल कुपोषित 18,348 में 13,048 कुपोषित बच्चों का स्वास्थ्य प्रबंधन (इलाज) किया गया है। इनके लिए 5937 स्वास्थ्य कर्मी लगाए गए हैं। इलाज वाले बच्चों में बांदा में 7685, चित्रकूट में 2670, हमीरपुर में 2066 और महोबा में 627 बच्चे हैं। बांदा में 4375, चित्रकूट में 93, हमीरपुर में 1275 और महोबा में 194 स्वास्थ्य कर्मी लगाए गए हैं।
घर-घर हो रहा कुपोषितों का सर्वे
बाल एवं पुष्टाहार विभाग का कहना है कि चित्रकूटधाम मंडल में स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर कुपोषित बच्चों को चिह्नित और उनके इलाज का प्रबंधन कर रही हैं। इनमें 9626 कुपोषित और 2369 अति कुपोषित (कुल 12,295) बच्चे शामिल हैं।
मंडल में 3381 किशोरी-महिला एनीमिया ग्रस्त
चित्रकूटधाम मंडल में बालिकाओं और महिलाओं में एनीमिया यानी खून की कमी भी पाई जा रही है। चारों जिलों में 3381 किशोरी, बालिकाओं और महिलाओं को इससे ग्रस्त पाया गया है। इलाज के बाद कई स्वस्थ हो गई हैं। लगभग 1125 एनीमिया पीड़ित अभी शेष हैं। बांदा में 290, चित्रकूट में 834, हमीरपुर में 45 और महोबा में 2212 किशोरी, बालिका और महिलाओं को एनीमिया का रोगी पाया गया है।
कुपोषित बच्चों के लिए शासन की कई योजनाएं चल रही हैं। आशा, एएनएम, आंगनबाड़ी आदि घर-घर जाकर ऐसे बच्चों को चिह्नित करती हैं और उन्हें इलाज व पोषाहार आदि की व्यवस्था कराती हैं। कुपोषित बच्चों का प्रति माह वजन लिया जाता है। उन्हें नियमित रूप से पोषाहार दिया जा रहा है। कुपोषित बच्चों के परिवार को गाय उपलब्ध कराई गई है। -सुधीर कुमार, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/जिला कार्यक्रम अधिकारी, बांदा।