बांदा। अंकल! आदाब, मैं इस वक्त कीव में मेट्रो रेलवे स्टेशन पर हूं। यहां की मिलिट्री हम लोगों को बंकरनुमा मेट्रो स्टेशन पर ले आई है। बार-बार शहर में सायरन बज रहे हैं। रुक-रुककर धमाकों की आवाज आ रही है। सड़कें खाली हैं। किसी को निकलने नहीं दिया जा रहा। आप सब दुआ करें। मेरे साथ कई अन्य भारतीय छात्र-छात्राएं भी यहां परेशान हैं।’
शुक्रवार को दोपहर शहर के छावनी निवासी अजीज मंसूरी की यह बातचीत अपनी सगी भतीजी अलीशा मंसूरी से फोन पर हुई। अलीशा यूक्रेन के कीव शहर में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा है। वह चार माह पहले ही नवंबर 2021 में वहां पहुंची है और दाखिला लिया है।
अलीशा ने शुक्रवार को मैसेज भी भेजा। इसमें उसने बताया कि उसके साथ कई भारतीय छात्र अत्यंत कठिनाई में हैं। अलीशा ने भारत सरकार से निवेदन किया है कि उसे और उसके साथ फंसे भारतीयों को यूक्रेन से निकालकर अपने वतन पहुंचाने में मदद करे। उधर, यहां अलीशा के घर में पिता रफीक मंसूरी और परिवार के सभी लोग उसकी खैर-खैरियत और सलामती के लिए दुआएं कर रहे हैं।
उधर, बांदा जनपद का एक और युवा यूक्रेन के युद्ध में फंस गया है। बिसंडा कस्बा के किराना व्यवसायी नरेशचंद्र गुप्ता का बेटा नीरज गुप्ता यूक्रेन के यीवानों फ्राकिवस्क शहर में नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस कर रहा है। उसने जुलाई 2018 में दाखिला लिया था। उसका यह आखिरी साल है।
पिछले जून में घर आया था। अगस्त में वापस गया था। अब युद्ध छिड़ने के बाद घर के लोग फेसबुक और वीडियो कॉलिंग से लगातार उसकी पल-पल की खबर ले रहे हैं, लेकिन नेटवर्क अक्सर आड़े आ रहा है। मां सुनीता ने बताया कि 28 फरवरी को नीरज को यहां घर आना था। फ्लाइट का टिकट बुक कर लिया था।
लेकिन फ्लाइट रद्द हो जाने से वह वहां फंसा है। नीरज के माता-पिता और पूरा परिवार रात-दिन पूजापाठ कर बेटे की सलामती की प्रार्थनाएं कर रहे हैं। रिश्तेदार और पड़ोसी भी उसकी कुशलक्षेम पूछने घर आ रहे हैं। नीरज के साथ विधूना (औरैया) निवासी शिव प्रताप सिंह चौहान भी एमबीबीएस का छात्र है। वह भी वहां फंसा है।
यूक्रेन में फंसा नीरज गुप्ता। - फोटो : BANDA
बेटे की फोटो के साथ सलामती की दुआ कर रहे नीरज के माता-पिता। - फोटो : BANDA