फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बांदा पंचायत चुनाव: भाजपा के लिए खतरे की घंटी हैं नतीजे, विधानसभा चुनाव रिहर्सल में ‘फेल’ रही

Fri, 07 May 2021 09:17 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा

सार

भाजपा सहित सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के हाईकमान ने पंचायत चुनावों को चंद महीने बाद होने वाले चुनावों को प्रभावित करने की दलीलें देकर अपने कार्यकर्ताओं को जोश दिलाया था लेकिन चुनावी नतीजों से यही सामने आया कि इस मूलमंत्र को सबसे ज्यादा बसपा ने अपनाया।
विज्ञापन
बांदा पंचायत चुनाव 2021 - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बांदा जिले में पंचायत चुनावों के नतीजों को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की रिहर्सल के रूप में देखा जा रहा है। ये नतीजे सत्तारूढ़ दल भाजपा के लिए खतरे की घंटी हैं। जनपद के सांसद और चारों विधायक भाजपा के होने के बावजूद पंचायत चुनाव परिणामों की परीक्षा में ये ‘फेल’ साबित हुए। जिले की 30 जिला पंचायत सीटों में भाजपा को मात्र सात सीटों पर ही सफलता मिली है। 
विज्ञापन


भाजपा सहित सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के हाईकमान ने पंचायत चुनावों को चंद महीने बाद होने वाले चुनावों को प्रभावित करने की दलीलें देकर अपने कार्यकर्ताओं को जोश दिलाया था लेकिन चुनावी नतीजों से यही सामने आया कि इस मूलमंत्र को सबसे ज्यादा बसपा ने अपनाया।

कई वर्षों से राजनीतिक हासिये पर होने के बाद भी बांदा जनपद में बसपा ने पंचायत चुनाव में अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज कराकर सत्तारूढ़ दल समेत सपा, कांग्रेस आदि को भी चौंका दिया है। पंचायत चुनाव में नाकामी और कोरोना महामारी में सरकारी अव्यवस्थाओं से भाजपा की दोहरी किरकिरी हो रही है।
विज्ञापन


प्रमुख विपक्षी दल भाजपा की इस दुर्दशा को आम लोगों के बीच बरकरार रखने में कामयाब रहे तो अगले वर्ष के शुरूआती महीनों में होने वाले विधान सभा चुनाव में भाजपा को खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। जिला पंचायत जिले की महत्वपूर्ण निकाय मानी जाती है। इसमें निवर्तमान अध्यक्ष भाजपा की ही सरिता द्विवेदी थीं।

वह विधायक प्रकाश द्विवेदी की पत्नी हैं। पंचायत चुनाव नतीजों ने भाजपा की जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर पुन: वापसी काफी जटिल और चुनौती भरी कर दी है। अध्यक्ष के लिए कम से कम 16 सदस्यों की जरूरत होगी जबकि भाजपा समर्थित सदस्य मात्र सात हैं। भाजपा को बाकी नौ सदस्य जुटाने में काफी पापड़ बेलने होंगे।

भाजपा विधायकों के क्षेत्र में विपक्षियों की सेंध 
जनपद के सांसद सहित चारों भाजपा विधायकों के निर्वाचन क्षेत्र में कहीं भी भाजपा बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। हर क्षेत्र में सपा और बसपा तथा अपना दल ने सेंधमारी की। भाजपा के सांसद और विधायक अपने क्षेत्र के वार्डों में भगवा फहराने में फेल साबित हुए। बबेरू क्षेत्र में जिला पंचायत की लगभग आठ सीटें हैं। यहां भाजपा को मात्र दो सीटें मिली हैं।

सपा सब पर भारी रही और तीन सदस्य जिताए। बसपा को दो सीटों पर सफलता मिली है। तिंदवारी क्षेत्र में लगभग पांच डीडीसी वार्ड हैं। यहां भी भाजपा को मात्र एक सीट मिली है। बसपा ने जहां दो सीटों पर कब्जा किया है वहीं सपा को एक वार्ड में सफलता मिली है। बांदा विधान सभा क्षेत्र में भी भाजपा को निराशा मिली। यहां लगभग पांच वार्डों में भाजपा को सिर्फ एक सीट पर ही जीत मिली है। दो में बसपा जीती है। नरैनी विधान सभा क्षेत्र में अपना दल ने दो सीटें जीती हैं। यहां भाजपा और बसपा को एक-एक सीट मिली है। 

बगावत भाजपा पर भारी 
भाजपा पर उसके बागी भी भारी पड़े। उदाहरण के लिए बबेरू क्षेत्र के वार्ड पांच में भाजपा के पूर्व मंत्री शिवशंकर सिंह पटेल की पत्नी कृष्णा पटेल ने टिकट न मिलने पर बगावत करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ा था। वह जीत गईं। हालांकि भाजपा हाईकमान ने मतदान के पहले ही पूर्व मंत्री श्री पटेल को पार्टी से छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया था। 

तीन वार्डों ने अपना दल को अपनाया
जिला पंचायत चुनाव में अबकी अपना दल ने अन्य दिग्गज दलों को चौंका दिया है। नरैनी विधान सभा क्षेत्र में दो वार्डों 25 व 26 में पार्टी को वहां के मतदाताओं ने अपनाया है। बांदा विधान सभा क्षेत्र के वार्ड 21 में भी अपना दल की महिला प्रत्याशी जीती हैं। 

सीट और वोट दोनों में ही बसपा की बढ़त
जिला पंचायत चुनाव में बसपा ने सत्तारूढ़ दल भाजपा से चार सीटें और 34513 वोट अधिक हासिल किए। बसपा को सभी 11 वार्डों में 73,003 वोट प्राप्त हुए। जबकि भाजपा सात वार्डों में 38490 वोट हासिल कर सकी।
 
विज्ञापन

कोरोना पर फोड़ा हार का ठीकरा
जिला पंचायत चुनाव के नतीजों पर राजनीतिक दल और उनके जनप्रतिनिधि अपनी सफाई में तरह-तरह की दलीलें दे रहे हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष रामकेश निषाद ने पार्टी की हार की वजह कोरोना महामारी बताई। कहा कि अध्यक्ष का चुनाव उनकी पार्टी लड़ेगी। सांसद आरके सिंह पटेल का कहना है कि वह संक्रमित होकर चित्रकूट स्थित अपने आवास में होम आइसोलेशन में थे।

चुनाव प्रचार में नही निकल सके। विधायक प्रकाश द्विवेदी ने भी खुद को कोरोना संक्रमित हो जाने से होम आइसोलेशन में रहने की बात कही। विधायक राजकरन कबीर ने भी हार का ठीकरा कोरोना पर फोड़ा। कहा कि महामारी से प्रचार प्रभावित हुआ। उधर, बसपा जिलाध्यक्ष गुलाब वर्मा का कहना था कि मतदाताओं में बसपा के प्रति पूरा रुझान है। पंचायत चुनाव ने यह साबित कर दिया। दावा किया कि विधान सभा चुनाव में हम ऐसा ही प्रदर्शन दोहराएंगे।

न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर
‘न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर’; पंचायत चुनाव पर सपा की मंशा कुछ ऐसी ही रही। जिला पंचायत सदस्य की 30 सीटों में सपा के सिर्फ तीन सदस्य ही निर्वाचित हुए। इसकी मुख्य वजह गुटबाजी मानी जा रही है। इसके अलावा ज्यादातर पार्टी के दिग्गज नेता चुनाव प्रचार से दूर रहे। इसी का नतीजा है कि सपा पंचायत चुनाव में ज्यादा प्रभावी नहीं रही। हालांकि तीन सीटों पर उसने सफलता की कहानी लिखी। कहा जाता है कि यदि पार्टी से जुड़े दिग्गजों का सहयोग मिलता तो चुनाव परिणाम और भी बेहतर हो सकता था। हालांकि जिलाध्यक्ष विजयकरन यादव ने गुटबाजी से इनकार किया है। उनका कहना है कि सभी ने पूरा सहयोग दिया। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें