बांदा। चाचा के घर रहकर पढ़ाई कर रहे 14 वर्षीय किशोर ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर दी। माता-पिता की कई वर्षों पूर्व मौत हो चुकी है। चाचा ही उसकी परवरिश कर रहा था। आत्महत्या की वजह पता नहीं चल सकी। परिजन इसे लड़कपने में उठाया गया कदम मान रहे हैं। एक अन्य घटना में युवती ने मायके में फांसी लगाकर जान दे दी।
घटना बबेरू कोतवाली क्षेत्र के कस्बा अंतर्गत गायत्री नगर की है। लगभग 14 वर्षीय हिमांशु के पिता रामबाबू उर्फ सोमदत्त की 2008 में बीमारी से मौत हो गई थी। उसके कुछ वर्षों बाद मां सीमा की भी मौत हो गई। तब हिमांशु मात्र 7-8 वर्ष का था। माता-पिता की मौत के बाद हिमांशु के पालन-पोषण का जिम्मा उसके चाचा कुलदीप ने संभाल लिया। तब से हिमांशु और उसके दो छोटे भाई व बहन चाचा के यहां रह रहे थे। हिमांशु बबेरू में ही 7वीं कक्षा में पढ़ रहा था। सोमवार की शाम हिमांशु ने घर के कमरे में साड़ी बांधकर गर्दन में फंदा कस लिया और फांसी पर झूल गया। उसकी वहीं मौत हो गई। कुछ देर बाद चाची ने शव टंगा देखा। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
मंगलवार को मेडिकल कालेज स्थित पोस्टमार्टम हाउस में मृतक के चाचा अशोक ने बताया कि घर में कोई ऐसी स्थिति नहीं थी कि हिमांशु आत्महत्या को मजबूर होता। चाचा ने कयास जताया कि लड़कपने में यह घातक कदम उठा लिया। कोतवाली के एसएसआई विजय सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया आत्महत्या मानकर शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। परिजनों ने भी आत्महत्या की ही बात कही है।