बांदा। छेड़छाड़ के फरार आरोपी की कुर्की के लिए पुलिस उपनिरीक्षक द्वारा दी गई अर्जी को अदालत ने खारिज कर दिया। इसके पूर्व जारी धारा 82 सीआरपीसी की नोटिस पुलिस ने नियमानुसार तामील नहीं कराई थी।
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट में धारा 83 के तहत दी अर्जी को खारिज करते हुए धारा 82 की तामील नियमों के मुताबिक पुन: कराने के आदेश दिए हैं। साथ ही पुलिस अधीक्षक और संयुक्त निदेशक (अभियोजन) को आदेश की प्रति भेजकर कहा है कि सभी थानाध्यक्षों और उप निरीक्षकों को न्यायालय के आदेशों की तामील की अवधि के अनुसार कराए जाने के निर्देश दें।
देहात कोतवाली क्षेत्र के गांव में छेड़छाड़ 354ख व 342 आईपीसी और 7/8 पॉक्सो एक्ट के मामले में अभियुक्त राजेश उर्फ राजकुमार पुत्र ताम्रध्वज फरार है। उसके विरुद्ध गैर जमानती वारंट और धारा 82 सीआरपीसी की नोटिस जारी हो चुकी है। देहात कोतवाली के उप निरीक्षक/विवेचक आरपी यादव ने विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट/पंचम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में अर्जी देकर अनुरोध किया कि धारा 83 का आदेश जारी किया जाए।
विशेष न्यायाधीश/एडीजे (पंचम) मोहम्मद रिजवान अहमद ने सुनवाई के दौरान केस डायरी का अवलोकन करने के बाद अपने आदेश में कहा कि केस डायरी के मुताबिक नोटिस को गवाहों के सामने अभियुक्त के दरवाजे पर चस्पा किया गया। लेकिन इसकी प्रति न्यायालय की नोटिस बोर्ड पर चस्पा किए जाने का उल्लेख नहीं है। न ही अभियुक्त के गांव में डुग्गी/मुनादी पिटवाई गई।
विवेचक ने धारा 82 सीआरपीसी का नियमानुसार तामीला नहीं कराया, जबकि धारा 83 का आदेश लेने के लिए धारा 82 का तामीला जरूरी है। कहा कि धारा 83 के आदेश जारी करने का कोई विधि संगत आधार नहीं है। न्यायाधीश ने उप निरीक्षक की अर्जी खारिज करते हुए धारा 82 (अभियुक्त की हाजिरी की नोटिस) पुन: जारी करने के आदेश दिए।