अतर्रा (बांदा)। राज्यपाल की संस्तुति के बाद नगर विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव ने अतर्रा पालिकाध्यक्ष को 29 जुलाई को बर्खास्त कर दिया। उन पर पालिका निधि को हानि पहुंचाने और दुरुपयोग जैसे कई अनियमितताओं के आरोप हैं। करीब एक साल पूर्व शासन ने उन्हें निलंबित कर दिया था। उनके वित्तीय अधिकार भी सीज कर दिए गए थे।
गवर्नर की संस्तुति के बाद अपर मुख्य सचिव डा. रजनीश दुबे ने पालिकाध्यक्ष जगदीश गुप्ता उर्फ भाऊ के खिलाफ बर्खास्तगी कार्रवाई पालिका अधिनियम की धारा 482 (क) (ख) के अंतर्गत की गई है। बर्खास्तगी के बाबत 31 जुलाई को डीएम आनंद कुमार सिंह को भेजे पत्र में पालिकाध्यक्ष पर कर्तव्य पालन में चूक और लापरवाही, पालिका निधि को हानि पहुंचाने व दुरुपयोग आदि का हवाला दिया गया है।
विधायक राजकरण कबीर और सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी सहित सभासदों ने अनियमितताओं की शिकायत की थी। इस पर 23 अक्तूबर 2019 को तत्कालीन मंडलायुक्त ने संयुक्त विकास आयुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। नौ बिंदुओं पर टीम ने जांच की और रिपोर्ट नगर विकास विभाग को भेजी थी। पालिकाध्यक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ था।
13 नवंबर 2020 को पालिकाध्यक्ष के वित्तीय अधिकार सीज कर दिए गए थे। मामले की जांच शासन स्तर पर चलती रही। बर्खास्तगी का पत्र डीएम ने ईओ को भेज दिया। इस बाबत ईओ राम सिंह का कहना है कि शासन से चेयरमैन की बर्खास्तगी आदेश प्राप्त हो गया है। इसे तामील कराया जा रहा है।