सिर्फ 15 बरस की उम्र में लूट का अपराध अंजाम देने वाले को 40 वर्ष की उम्र में रिहाई मिली। 25 सात तक मुकदमा चला।
इस
दौरान किशोर अपराधी को पांच महीने जेल में भी बिताने पड़े। अदालत की
भाग-दौड़ से तंग आकर बाल किशोर ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया।
किशोर न्याय बोर्ड ने उसकी हरकत की भर्त्सना करते हुए भविष्य में बेहतर जीवन जीने की सलाह देकर घर जाने की अनुमति दी।
जसपुरा
थाना क्षेत्र के रामपुर गांव के प्रताप सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि
22 नवंबर 1990 को दोपहर वह गांव के बैंक से रुपये निकालकर साइकिल से बांदा आ
रहा था।
मवई घाट लिंक रोड के पास पहले से ज्वार के खेत में छिपे
दो लड़के अचानक आए और साइकिल रोक कर तमंचा अड़ा दिया। गोली मारने की धमकी
देकर 1195 रुपये और 32 बोर की लाइसेंसी रिवाल्वर छीनकर भाग गए। गांव के दो
लोगों ने उन्हें पहचान लिया।
पुलिस ने तफ्तीश के दौरान भूरा उर्फ
बृजेश और कमलेश सिंह को लूट का आरोपी बताते हुए दोनों के विरुद्ध कोर्ट में
लूट और शस्त्र अधिनियम का आरोप पत्र दाखिल किया। दोनों ने न्यायालय में
हाजिर होकर जमानत कराई। पहले यह मामला विशेष न्यायाधीश (डकैती) की अदालत
में चला।
इसी दौरान अभियुक्त भूरा की मौत हो गई। नाबालिग अभियुक्त
कमलेश सिंह का मुकदमा किशोर न्याय बोर्ड को भेज दिया गया। अभियोजन ने छह
गवाह पेश किए।
शुक्रवार को किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट
तबरेज अहमद ने इस मामले में फैसला सुनाया। पांच पृष्ठ के फैसले में कहा कि
कमलेश ने जब अपराध किया था तब वह 15 वर्ष छह माह 27 दिन का था। इस बीच
पांच माह जेल में रह चुका है। करीब 25 साल से मुकदमा चल रहा है।
बोर्ड
ने आरोपी से कहा कि भविष्य में ऐसा अपराध न करे। न किसी गलत संगत में
पड़े। सामाजिक सेवा में भाग ले। प्रधान न्यायाधीश ने 25 साल के अच्छे
चाल-चलन को भी मद्देनजर रखा। अपने आदेश में बाल आरोपी की भर्त्सना करते हुए
चेतावनी के साथ घर जाने की अनुमति दे दी।