पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित कालिंजर दुर्ग में ढहा पड़ा रानी महल
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पुरातत्व महत्व की संरक्षित इमारतें भले ही खंडहर में तब्दील होती जा रही हैं, पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग इनके रखरखाव पर लाखों रुपये खर्च दर्शा रहा है। बांदा जिले में पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित केंद्रीय स्मारकों की संख्या 19 बताई गई है। इनमें मात्र 6 स्मारकों पर पिछले दो वर्षों में 30 लाख 11 हजार 912 रुपये खर्च बताए गए हैं। सबसे ज्यादा 26 लाख 60 हजार 221 रुपये कालिंजर किले पर खर्च बताए गए हैं।
जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत कार्यालय अधीक्षण पुरातत्वविद, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, लखनऊ ने आरटीआई एक्टिविस्ट कुलदीप शुक्ला को दी सूचना में बांदा जिले के केंद्रीय संरक्षित स्मारकों की सूची और उन पर वित्तीय वर्ष 2016-17 व वर्ष 2017-2018 में हुए खर्च का ब्योरा दिया है। इसमें बताया गया है कि जिले में कुल 19 संरक्षित स्मारक हैं।
दो साल में सबसे ज्यादा 76 लाख 69 हजार 933 कालिंजर दुर्ग में निर्माण और विकास कार्यों पर खर्च हुए हैं। इसमें सीताकुुंड, सीतासेज, पाताल गंगा, पांडू कुंड, भैरो का झिरका, सिद्ध की गुफा, भगवानसेज, मृगधारा, कोटितीर्थ, नीलकंठ मंदिर भी शामिल हैं। इसके अलावा बांदा शहर की नवाबी जामा मस्जिद पर दो साल में एक लाख 73 हजार 377 रुपये का खर्च बताया गया है।
बांदा शहर की बाउली (चिल्ला रोड) में 37 हजार 334 और मड़फा मठ में 33 हजार 774, अतर्रा तहसील के रौली गांव में 55 हजार 472 रुपये तथा गुडऱामपुर स्थित बिल्हरी मठ में 51 हजार 134 रुपये खर्च बताए गए हैं। पुरातत्व विभाग की सूची के मुताबिक जिले में बांदा शहर के कटरा व सिविल लाइन के स्मारक और वीरपुर (अतर्रा), ग्रामपुर, रसिन आदि शामिल हैं।