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पन्ना टाइगर रिजर्व में एक और बाघ की मौत

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बांदा : पन्ना टाइगर ​​रजर्व क्षेत्र में पड़ा ब​​​घन का शव। संवाद - फोटो : BANDA
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बांदा/करतल। बुंदेलखंड के इकलौते पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में बाघिन की मौत हो गई। शव रात में पार्क के जंगल में पड़ा मिला। बाघिन की उम्र करीब तीन वर्ष थी। पार्क प्रबंधन ने इसका पोस्टमार्टम कराया है। एक माह के अंदर बाघ की मौत की यह दूसरी घटना है। पिछले माह शिकारियों ने करंट से युवा बाघ का शिकार कर खाल निकालकर शव तालाब में फेेंक दिया था।
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सीमावर्ती पन्ना (एमपी) जिले में स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में बाघिन के मरने की ताजा घटना उस समय हुई, जब बाघों की गणना होनी है। पी-213 (63) नंबर से पंजीकृत इस बाघिन का शव 10 नवंबर को पार्क में गश्त कर रही टीम को रात करीब एक बजे अमान गंज बफर की बीट रमपुरा के कक्ष संख्या 1357 में पड़ा मिला। खबर मिलते ही पार्क प्रबंधन में हड़कंप मच गया। कुछ ही देर बाद पार्क के संचालक, उप संचालक, वन्य प्राणी चिकित्सक और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण के प्रतिनिधि भी मौके पर पहुंच गए।
पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने प्रेस नोट में कहा है कि पन्ना टाइगर रिजर्व में जन्मी व पली बढ़ी बाघिन पी-213 की मृत्यु पर मौके पर कोई अवैध गतिविधि के साक्ष्य नहीं पाए गए हैं। प्रथम दृष्टया बाघिन की मौत प्राकृतिक प्रतीत होती है। बताया कि बाघिन के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद क्षेत्र संचालक की उपस्थिति में दाह संस्कार कर दिया गया है।
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हाईफाई सुरक्षा, फिर भी मौत का सिलसिला जारी
पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों के संरक्षण के भरपूर दावों के बीच बाघों की मौत का सिलसिला चल पड़ा है। पार्क में संरक्षित बाघों की निगरानी के लिए उन्हें रेडियो कॉलर पहनाया गया है। कैमरों से लगातार उनकी नजर रखी जा रही है। क्षेत्रीय संचालक का कहना है कि कोरोना संक्रमण के दौरान केंद्रीय वन मंत्रालय ने बाघों की सुरक्षा के लिए जो गाइड लाइन जारी की थी, उसी के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
कुनबा बढ़ने के साथ ही बाघों का पलायन भी
पन्ना टाइगर रिजर्व में एक तरफ जहां बाघों का कुनबा बढ़ रहा है, वहीं कुछ बाघ नए ठिकानों की तलाश में पलायन भी कर रहे हैं। बीते कुछ अरसे में लगभग 30 से ज्यादा बाघों ने पन्ना अभ्यारण्य को अलविदा कह दिया है। हालांकि वन विभाग के अधिकारियों ने इसे प्राकृतिक और स्वाभाविक प्रक्रिया बताया है। बताते हैं कि करीब एक दशक पहले यहां एक भी बाघ नहीं बचा था। इस पर बाघों का कुनबा बढ़ाने की योजना शुरू की गई। मौजूदा में यहां बाघों का आंकड़ा लगभग 70 है। कई बाघिन इस वर्ष शावकों को जन्म दे सकतीं हैं।
चार साल में देश में 200 बाघों की मौत
पिछले चार साल में देश में 200 से अधिक बाघों की मौत हुई है। इनमें 63 को शिकारियों ने मारा। वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसाइटी आफ इंडिया की इस रिपोर्ट के मुताबिक इस साल मध्य प्रदेश में 31, महाराष्ट्र में 21, कर्नाटक में 13, यूपी में सात, केरल व असम में पांच-पांच बाघों की मौत हुई है
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