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अन्ना पशुओं को व्यक्तिगत संरक्षण से परहेज कर रहे किसान

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बांदा के खप्टिहा क्षेत्र में अन्ना पशु। - फोटो : BANDA
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बांदा। अन्ना मवेशियों की देखरेख और उनके सही संरक्षण के लिए प्रदेश की योगी सरकार लगातार प्रयासरत है। अन्ना मवेशियों के संरक्षण के लिए प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री निराश्रित और बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना अगस्त में शुरू की थी। पूरे प्रदेश में लागू योजना के लिए योगी सरकार ने संरक्षणदाताओं को आकर्षित करने के लिए भी कई सहूलियतें दी हैं, लेकिन अन्ना मवेशियों की समस्याओं से जूझ रहे चित्रकूटधाम मंडल में यह योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है।
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सरकार द्वारा आर्थिक मदद मुहैया कराने के बाद भी मंडल के किसान इसके प्रति आकर्षित नहीं हो रही। इसकी एक वजह बुंदेलखंड में चारे का संकट भी सबसे बड़ा रोड़ा साबित हो रहा है। इस वजह से यहां के किसान इस योजना के प्रति अपना जुड़ाव नहीं कर पा रहे हैं। योजना संचालित कर रहे पशुपालन विभाग के ताजा आंकड़े इसके गवाह हैं। योजना लागू हुए ढाई माह माह बीत गए और अब तक मात्र सात फीसदी किसानों व ग्रामीणों ने ही इस योजना को अपनाया है।
चारों जनपदों में 62,106 अन्ना मवेशियों को व्यक्तिगत संरक्षण में देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें अब तक मात्र 1803 किसानों ने ही दिलचस्पी लेते हुए सिर्फ 4371 अन्ना पशुओं को व्यक्तिगत संरक्षण में लिया है। इसमें सबसे ज्यादा तीन हजार मवेशी पशु हमीरपुर के हैं।
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महोबा में किसी भी किसान ने अन्ना मवेशियों को संरक्षण में नहीं लिया है। मुख्यमंत्री निराश्रित/बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना में पशुओं को अपने व्यक्तिगत संरक्षण में रखने वाले को प्रति मवेशी 900 रुपये चारा-भूसा के लिए दिया जा रहा है। किसानों और पशुपालकों की इस बेरुखी पर पशुपालन विभाग हैरत में है। पशु चिकित्साधिकारियों को प्रत्येक रविवार में किसानों को इस योजना के प्रति प्रेरित करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
जनपद पशु पालक संरक्षित पशु
बांदा 118 276
चित्रकूट 85 155
हमीरपुर 1600 3940
महोबा 00 00
योग- 1803 4371
892 आश्रय स्थलों में 92 हजार अन्ना मवेशी---
पशुपालन विभाग ने दावा किया कि चित्रकूटधाम मंडल में 892 स्थायी और अस्थायी गोवंश पशु आश्रय स्थल संचालित हो रहे हैं। इनमें 92,469 अन पशु संरक्षित हैं। जनपदवार आंकड़ों के मुताबिक, चित्रकूट में 27,495, महोबा में 24,685, हमीरपुर में 21,237 व बांदा में 19,052 पशु आश्रय स्थलों में रखे गए हैं।
अन्ना पशुओं पर साढ़े सात करोड़ खर्च
मंडल के चारों जनपदों में पिछले छह माह में स्थायी और अस्थायी गोवंश स्थलों में पशुओं के भरण-पोषण में अब तक 7.50 करोड़ खर्च होना बताया गया है। पशु पालन विभाग के अनुसार, बांदा में 1.25 करोड़, महोबा में 2.25 करोड़, हमीरपुर में 2.20 करोड़ और चित्रकूट में 1.85 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
चार माह में आश्रय केंद्रों में 10 अन्ना गायों की मौत---
स्थायी और अस्थायी पशु आश्रय केंद्रों में सुविधाएं भी अपर्याप्त हैं। चारा-भूसा, पानी और बारिश व धूप से बचने के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं तथा बीमार पशुओं के इलाज का इंतजाम न होने जैसी अव्यवस्थाओं का शिकार होकर अन्ना पशुओं की मौत हो रही हैं। पशुपालन विभाग के मुताबिक, बीते चार माह में मंडल के पशु आश्रय केंद्रों में 10 पशुओं की मौत हुई है। इनमें बांदा में दो, महोबा में चार, चित्रकूट में चार पशु शामिल हैं।
भूसे की किल्लत से योजना में ब्रेक---
‘मंडल में पर्याप्त फसलें न होने से भूसे की काफी किल्लत रहती है। शायद किसान इसी वजह से कन्नी काट रहे हैं। इस योजना के प्रति किसानों और ग्रामीणों को प्रेरित करने के लिए पशु चिकित्साधिकारियों के नेतृत्व में टीमें बनाई गई हैं।’
-मनोज कुमार अवस्थी, मंडलीय उपनिदेशक, पशुपालन विभाग
अगस्त में मंजूरी मिली थी योजना को
निराश्रित, बेसहारा गोवंश का पालन करने वाले किसानों को 30 रुपये प्रतिदिन प्रति पशु देने के लिए मुख्यमंत्री निराश्रित, बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना को प्रदेश की कैबिनेट ने अगस्त माह में मंजूरी दी थी। इसमें निराश्रित पशु पालने पर किसानों को प्रति पशु 900 रुपये मिलेंगे। अगर वह 10 पशु ले जाएंगे तो 9000 रुपये मिलेंगे। प्रक्रिया के मुताबिक, स्थायी या अस्थायी गोवंश आश्रय स्थलों से निराश्रित, बेसहारा गोवंश को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इच्छुक पशु पालकों, किसानों या अन्य व्यक्तियों को सुपुर्द किया जाएगा। प्रदेश में पहले चरण में एक लाख पशु हस्तांतरित किए जाना हैं। सरकार का मानना है कि इस योजना से सामाजिक सहभागिता बढ़ेगी।
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