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किसानों के दुश्मन बने अन्ना मवेशी

Sun, 24 Jan 2016 11:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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बांदा। सूखे से जूझ रहे बुंदेलखंड के किसानों को अन्ना मवेशी तबाह कर रहे हैं। एक तो सूखे के चलते फसलों की पूरी बुआई नहीं हो पाई, जो किसान किसी तरह जुगाड़ कर बुआई की है, उनकी फसलें अन्ना मवेशी चट कर रहे हैं।
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किसान फसलों को बचाने के लिए खेत में रात बिता रहे हैं। इसके बावजूद वे अपनी फसलें नहीं बचा पा रहे हैं। जरा सा मौका पाते ही अन्ना मवेशी फसलें चट कर जाते हैं।

करीब दो दशक से बुंदेलखंड में दैवी आपदा की मार लगातार पड़ रही है। सूखा और अतिवृष्टि से किसानों को हर साल जूझना पड़ रहा है।

सूखे के चलते इस साल चित्रकूटधाम मंडल में ज्यादातर खेत खाली हैं। कृषि उप निदेशक ने शासन को भेजी अपनी रिपोर्ट में बताया कि चारों जिलों में औसतन गेहूं, चना की बुआई मात्र 40 फीसदी हुई है।
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बांदा में 1,52,516 हेक्टेअर मेें सिर्फ 79,308 हेक्टेअर (52 फीसदी), हमीरपुर में 1,13,945 हेक्टेअर मेें 62,670 (55 फीसदी), महोबा में 69,976 हेक्टेअर मेें मात्र 9,796 (14 फीसदी) और चित्रकूट में 54,796 हेक्टेअर मेें मात्र 19,726 (36 फीसदी) बुआई हुई है।

चारे और भूसे का संकट होने से अन्ना मवेशियों की तादाद बढ़ रही है। चित्रकूटधाम मंडल में अन्ना मवेशियों की समस्या कुछ ज्यादा ही गंभीर है। यहां अन्ना मवेशियों की तादाद ढाई लाख से भी ज्यादा है।

सूखे के चलते बड़ी संख्या में पशुपालक दुधारू मवेशियों को अन्ना छोड़ने पर लाचार हैं। साल दर साल बढ़ रहे अन्ना मवेशियों के आंकड़े बताते हैं कि मंडल के चारों जिलों में अब सिर्फ अन्ना गायों की तादाद 2,58,447 हो गई है। अन्ना मवेशियों में सबसे ज्यादा 91,312 बांदा में हैं।

हमीरपुर में 67,917, चित्रकूट में 62,046 और महोबा में 37,172 अन्ना मवेशी हैं। ये आंकड़े पशुपालन विभाग के हैं। अन्ना मवेशियों से फसलों को बचाने के लिए जानलेवा ठंड में भी किसानों को खेतों में रात बितानी पड़ रही है।
 

आंदोलन के बाद भी नहीं हुआ समाधान
चित्रकूट। सूखे के कारण अन्ना मवेशियों की संख्या इतनी बढ़ गई कि किसानों को आंदोलन करना पड़ा। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए किसान डीएम से लेकर मंत्री तक गुहार लगा चुके हैं।

धरना प्रदर्शन, भूख हड़ताल भी किया, किंतु समस्या से निजात नहीं मिली। प्रशासन की उदासीनता देख दिसंबर में किसानों ने खुद इनसे छुटकारा पाने की ठानी। जगह-जगह अन्ना मवेशियों को बंधक बनाया।

किसान सैकड़ों मवेशी लेकर कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे। गांव के विद्यालयों में मवेशियों को रखा। हालांकि प्रशासन ने मवेशियों को कांजी हाउस और गौशाला में रखने के निर्देश दिए हैं।

डीएम नीलम अहलावत ने बताया कि जल्द ही गांवों में कांजी हाउस बनवाए जाएंगे। भाकियू जिलाध्यक्ष रामसिंह पटेल का कहना है कि अन्ना मवेशी किसानों के दुश्मन है।


किसानों की नाक में किया दम
हमीरपुर। जनपद में ढाई लाख से अधिक मवेशी हैं। सूखे के चलते ज्यादातर पशुपालकों ने अपने मवेशी अन्ना कर दिए। जिले में करीब एक लाख गायों को छोड़ा जा चुका है।

गुरुवार को पौथिया की ओर से हांककर लाए गए हजारों अन्ना मवेशियों को देखकर लोगों की आंखें फटी की फटी रह गईं। रात में किसानों ने हजारों गायों को यमुना पुल के उस पार कानपुर नगर में जनपद कर दिया।

हाईवे पर हजारों अन्ना मवेशियों के होने से जाम की स्थित बनी रहती है। सूखे से परेशान किसानों की नाक में अन्ना मवेशियों ने दम कर रखा है।

भीषण ठंड में भी किसान फसलों की दिन-रात रखवाली करने को मजबूर हैं। डीएम से सीएम तक से अर्जी लगाने के बाद भी किसानों को इस समस्या से निजात नहीं मिल रही है।

अन्ना मवेशियों के डर नही बोई फसल
महोबा। बारिश न होने से ज्यादातर किसान रबी की फसल की बुवाई नहीं कर पाए। जिन किसानों के पास कुओं का साधन भी हैं, उन्होंने अन्ना मवेशियों के डर से बुवाई नहीं की है।

किसानों का कहना है कि मीलों तक खेत खाली पड़े हैं। जिन लोगों ने बुवाई की है, अन्ना मवेशी धावा बोलकर उनकी फसल चट कर जाते हैं। हजारों की संख्या में सड़कों और खेतों में घूम रहे अन्ना मवेशियों से यहां के किसान परेशान हैं।

जिन किसानों ने बुआई की है, वे रात भर जागकर अपनी फसल की रखवाली कर रहे हैं, इसके बाद भी उनकी फसल तैयार हो पाएगी, इस पर संशय है। कारण जरा सा मौका पाते ही अन्ना मवेशी हरी-भरी फसलें चट कर जाते हैं।
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