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बुंदेलखंड की गोशालाओं को खंगालेगा एनीमल्स बोर्ड

Mon, 21 Jan 2019 10:53 PM IST
ASIF ASIF अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
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गिरीश भाई के साथ बैठक करते एडीजी राजाबाबू सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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बुंदेलखंड में दिन-प्रतिदिन विकराल होती जा रही अन्ना प्रथा पर नेशनल स्तर पर भी अब चिंता जताई जाने लगी है। यहां अन्ना मवेशी जिस तरह से लोगों की हरीभरी फसल को उजाड़ रहे हैं, उससे जहां स्वयं सेवी संगठन अन्ना मवेशियों को पालने को आगे बढ़ रहे हैं, वहीं प्रदेश सरकार ने भी गोशालाओं के निर्माण की पहल की है। अब यहां के अन्ना प्रथा पर नेशनल एनीमल्स वेलफेयर बोर्ड (राष्ट्रीय पशु कल्याण बोर्ड) भी आगे आया है। बोर्ड बुंदेलखंड की अन्ना प्रथा पर पैनी निगाह रखेगा। साथ ही यहां के अन्ना पशु आश्रय स्थलों और गोशालाओं का जायजा लेने के बाद उन्हें पंजीकृत भी करेगा।

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मानक पर खरे उतरने वाले पशु आश्रय स्थलों को बोर्ड से अनुदान भी मिल सकता है। इसके लिए अगले माह 28 फरवरी को बोर्ड का एक प्रतिनिधिमंडल बुंदेलखंड आ रहा है। बताया जाता है कि बोर्ड का प्रतिनिधिमंडल बांदा, महोबा और हमीरपुर जिलों का भ्रमण अन्ना प्रथा को खंगालेगा।

गौरतलब हो कि भारत सरकार के वन और पर्यावरण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला राष्ट्रीय एनीमल्स वेलफेयर बोर्ड देशभर में अन्ना पशुओं पर अत्याचार और पशु आश्रय स्थलों के रखरखाव आदि पर काम करता है। इसके अलावा गोशालाओं को लाभकारी फर्मों से जोड़ता है। इसके मद्देनजर बांदा के पचनेही गांव के बाशिंदे और मध्य प्रदेश में एडीजी (अपर पुलिस महानिदेशक) राजाबाबू सिंह ने सोमवार को दिल्ली में एनीमल्स बोर्ड से संपर्क किया।
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राजाबाबू ने बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य गिरीश भाई के साथ बैठक की और बुंदेलखंड की अन्ना समस्या के बारे में जानकारी दी। इस पर बोर्ड ने 28 फरवरी को चित्रकूटधाम मंडल के निरीक्षण और भ्रमण की मंजूरी दी है। एडीजी राजाबाबू सिंह ने बताया कि वरिष्ठ सदस्य गिरीश भाई के नेतृत्व में चित्रकूटधाम मंडल में बोर्ड का प्रतिनिधिमंडल पशु आश्रय स्थलों और गोशालाओं का निरीक्षण करेगा। सदस्य गिरीश भाई ने ‘अमर उजाला’ को फोन पर बताया कि वह भ्रमण के दौरान अन्ना गोशालाओं की समस्याओं का जायजा लेंगे।

उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश में बोर्ड अन्ना पशुओं को लेकर काफी काम कर रहा है। अन्ना गायों पर रिसर्च भी किया गया है। फिलहाल चित्रकूट जिले में एक गोशाला बोर्ड में पंजीकृत है। अब और गोशालाओं को भी बोर्ड में पंजीकृत किया जाएगा। उन्होंने इस दिशा में एडीजी राजाबाबू सिंह के प्रयासों को सराहा भी। 

गोशाला में डलवाए साढ़े चार लाख के पर्दे 
पचनेही गांव में आईपीएस अधिकारी राजाबाबू सिंह की कोठी में स्थित नचिकेता गोशाला को मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। यहां देश के मशहूर थारपारकर और गीर नस्लों की गायें हैं। गोशाला का काम देख रहे शांतिभूषण सिंह ने बताया कि इंटरलॉकिंग फर्श और टिनशेड वाली गोशाला में गायों को ठंड से बचाने के लिए साढ़े 4 लाख रुपये से कैनवास के पर्दे डाले गए हैं। बताया कि इसी परिसर में बुल (सांड़) शेड बनाया जा रहा है। जल्द ही उपरोक्त प्रजातियों के तीन सांड़ भोपाल से मंगाए जा रहे हैं। इन सांड़ों से गांव और इच्छुक पशुपालकों के पशुओं की नस्ल सुधारने के लिए नि:शुल्क गर्भाधान भी होगा। 

ग्रामीणों ने गांव को किया अन्ना पशु मुक्त 
नरैनी तहसील के पैगंबरपुर गांव में ग्राम प्रधान, लेखपाल और ग्रामीणों ने अपने संयुक्त प्रयासों से गोशाला बनाकर उसमें लगभग सौ अन्ना गायों को रखा है। चारों ओर कंटीले तार की घेराबंदी की गई है। प्रधान दुजेंद्र सिंह उर्फ बुक्का, सचिव अनिल कुमार, लेखपाल नंदकिशोर त्रिपाठी ने बताया कि सौमित्र सिंह, संतोष कुमार, सुनील, लालाराम, दादूराम, राजाभइया विश्वकर्मा आदि ग्रामीण के सहयोग से अस्थायी गोशाला बनाई गई है। भूसा और पयार की व्यवस्था कराई गई है। गांव को अन्ना पशुओं से निजात मिल गई है। 

गोशाला में बिक रहा 10 रुपये लीटर गोमूत्र 
खप्टिहा कलां। पुरानी तहसील के सांडी गांव में सपा के राज्यसभा सांसद विशंभर निषाद की निधि से बनवाई गई गोशाला अन्य गोशालाओं के लिए प्रेरणादायक साबित हो रही है। इस गोशाला से गोमूत्र से खर्च निकाला जा रहा है। 10 रुपये प्रति लीटर की दर से पिछले 15 दिनों में 25 हजार रुपये का गोमूत्र बेचा जा चुका है। लगभग 20 हजार लीटर गोमूत्र स्टाक में है। तहसील दिवस में ग्रामीणों ने डीएम हीरालाल से भूसा-चारा व्यवस्था की मांग की थी।

इस पर डीएम ने सांडी खदान संचालक को निर्देश दिए थे। डीएम के निर्देशों का हवाला देते हुए खदान संचालक आशीष शुक्ला ने हाल ही में गोशाला को 15 हजार रुपये दिए हैं। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि पतिराखन निषाद ने बताया कि इस राशि से पशुओं के भूसा-चारा आदि की व्यवस्था की जा रही है। खदान संचालकों ने खदान चलने तक मदद जारी रखने का भरोसा दिलाया है। उधर, खप्टिहा कलां पशु आश्रय में प्रधान प्रतिनिधि जाहर सिंह सहित सुरेंद्र सिंह राठौर, पोथल सिंह चंदेल आदि ने श्रमदान करके सफाई की। 

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