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नाराज दद्दू प्रसाद बोले, बसपा तोड़ने में लगी हैं मायावती

Mon, 02 Feb 2015 12:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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बसपा से निष्कासित पूर्व मंत्री दद्दू प्रसाद का कहना है कि मायावती खुद बसपा को तोड़ने में लगी हैं। उन्होंने कहा कि 2007 से 2012 की बसपा सरकार में मौकापरस्त और शोषणकारी लोग शामिल हो पूरा लाभ लूट ले गए।
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बहुजन समाज को तितर-बितर कर दिया। इसे वह अब जोड़ने का काम कर रहे हैं। तीन साल तक वह हथकड़ी और बेड़ी जैसे हालात में रहे। अब अपने घर लौट आए हैं।

रविवार को यहां एक मैरिज हाल में आयोजित ‘बहुजन समाज बनाओ अभियान’ की गोष्ठी में दद्दू प्रसाद ने कहा कि बसपा ने उन्हें इसलिए अपराधी माना कि उन्होंने कांशीराम के नष्ट किए गए इतिहास व विचारों को संकलन करके बहुजन समाज तक पहुंचा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के मूल निवासी द्रविड़ों को गुलाम व लाचार बना दिया। शूद्र समाज को शिक्षा, शस्त्र और संपत्ति धारण करने को दंडनीय अपराध घोषित कर दिया गया। आज के हालात पर कहा कि अब जरूरी हो गया है कि कांशीराम के मिशन को आगे बढ़ाकर लक्ष्य हासिल किया जाए।
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इस अवसर पर ‘सामाजिक परिवर्तन मंच’ का संयोजक जितेंद्र कुमार गौरव और सह-संयोजक शैलेंद्र कुमार राव को घोषित किया गया। गोष्ठी में बसपा सरकार में मंत्री रहे बशीरुद्दीन, नबी चौधरी (मौदहा), एआर अकेला (अलीगढ़), सर्वेश अंबेडकर (पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष, कन्नौज), श्रवण आजाद (रायबरेली) सहित शिवभूषण सिंह पटेल, बृजेश प्रजापति, रामरूप सिंह खंगार, विनोद कुमार सविता, द्वारिका प्रसाद पटेल, बलिदानी प्रजापति, संजय प्रजापति, शंकरलाल वर्मा, श्रीपाल वर्मा, रामनिवास वर्मा, इंद्रजीत यादव,  नौशाद अली भारती, शमीम, फैसल, जावेद, नवाब, जयकरण वर्मा, आर चंद्रा आदि शामिल रहे। इन्होंने बसपा छोड़कर ‘सामाजिक परिवर्तन मंच’ में शामिल होने की घोषणा की।

आज रामनगर में जनसभा, दिखाएंगे ताकत
चित्रकूट। बसपा से निष्कासन के बाद दद्दू प्रसाद सोमवार को रामनगर में जनसभा को संबोधित करेंगे। निष्कासन के बाद दद्दू की पहली जनसभा से उनके कद का पता चल जाएगा। प्रस्तुत हैं बातचीत के कुछ मुख्य अंश-
क्या रामनगर की जनसभा में नई राजनीतिक पार्टी की घोषणा करेंगे?
कांशीराम ने कहा था कि जिस राजनीतिक पार्टी के पीछे अराजनीतिक संगठन नहीं होता, वह सफल नहीं होती। इसलिए पहले तो पूरा ध्यान अराजनीतिक संगठन बनाने का है। बांदा में सामाजिक परिवर्तन मंच बनाकर इसकी शुरुआत कर दी है।
 तो अभी अभियान क्या है?
रामनगर में जो कार्यक्रम है, वह सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति आंदोलन के लिए बहुजन समाज बनाओ अभियान के तहत है। यहीं से मेरी राजनीति की नई दिशा तय होगी।
क्या अभी बसपा का पतन और होगा?
हां। लोग भांप नहीं सके। कांशीराम की फिलॉसफी बसपा की तथाकथित नायक ने छोड़ दी है. ऐसे में लोग नए नेतृत्व की ओर ताक रहे हैं। 
तथाकथित नायक से आपका तात्पर्य मायावती से है?
हां। लीडर ही सीढ़ी तोड़ देता है, जिससे कोई दूसरा वहां तक पहुंच न सके।
अगर पार्टी से निकाले न जाते तो क्या खुद इस्तीफा दे देते?
नहीं, लेकिन बेड़ियां और हथकड़ियां बहुत दिन से थीं। पर बसपा बनाने में मेरा भी योगदान है। मायावती खुद नहीं चाहतीं कि बसपा बनी रहे। भटके को तो रास्ता दिखाया जा सकता है पर जो जानबूझकर ऐसा कदम उठाए तो उसके लिए क्या किया जाए। अभी बहुत से लोग या तो पार्टी से निकलेंगे या निकाले जाएंगे।
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बसपा में लौटने का कोई इरादा?
हरगिज नहीं।

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