बांदा। चेहल्लुम पर गुरुवार को ताजिया जुलूस निकाले गए। ढोल-ताशों के बीच शोहदाए कर्बला की शहादत की यादें एक बार फिर ताजा हो गईं।
मातमी
धुनों के बीच ताजियों को केन नदी किनारे स्थित प्रतीकात्मक कर्बला मेें
सुपुर्दे खाक (दफन) किया गया। उधर, पूर्वी कोठी से निकले अलम जुलूस में
युवाओं ने सीनाजनी कर मातम मनाया।
परंपरागत इस्लामी कलेंडर के सफर
माह की 20वीं तारीख को चेहल्लुम मनाया जाता है। मोहर्रम माह की 10वीं तारीख
को कर्बला (ईराक) के मैदान में पैगंबरे इस्लाम के नवासे समेत 72 लोगों ने
इस्लाम और इंसानियत बचाने के लिए यजीद की भारी भरकम फौज से डटकर मुकाबला
किया।
उनकी शहादत के 40वें दिन गुरुवार को शहर मेें तमाम
इमामबाड़ों से ताजिया जुलूस निकाले गए। मुन्नन रेवड़ी वाले, कोदउवा जनाना,
टिर्री (अलीगंज) व एजाज चचा और सब्जी फरोशों (मर्दननाका) और बटोली (बलखंडी
नाका) के ताजिया दोपहर बाद बलखंडी नाका चौराहा में इकट्ठा हुए।
यहां
से ढोल-ताशों के बीच केन नदी किनारे स्थित प्रतीकात्मक कर्बला की ओर सभी
ताजिया रवाना हुए। नदी किनारे सभी ताजिए सुपुर्दे खाक किए गए।
उधर,
डिग्गी चौराहा स्थित पूर्वी कोठी से अलम जुलूस निकला। शोहदाए कर्बला की
याद में युवाओं ने सीनाजनी कर मातम मनाया। चिल्ला प्रतिनिधि के मुताबिक
गुगौली और सादीमदनपुर गांव में ताजिया निकाले गए।
चिल्ला बाईपास पर
दोनों ताजियों का मिलाप हुआ। युवाओं ने हैरतअंगेज करतब दिखाए। इस मौके पर
सादीमदनपुर निवर्तमान प्रधान अंजुम अली, कौसर अहमद, रज्जाक अहमद, अख्तर आदि
उपस्थित रहे।