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सालाना फातेहा पर बड़े हजरत को खिराजे अकीदत

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उर्स में नात पेश करते मौलाना रब्बानी। - फोटो : BANDA
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बांदा। मुफ्ती ए आजम बुंदेलखंड और मदरसा दारुल उलूम रब्बानिया के संस्थापक अल्लामा मौलाना हाफिज कारी सैय्यद मजहर रब्बानी (बड़े हजरत) का छठवां सालाना फातेहा/उर्स बुधवार को मनाया गया। उन्हें खिराजे अकीदत (श्रद्धांजलि) दी गई।
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शहर के कच्चा तालाब स्थित दरगाह परिसर में मजार पर गुलपोशी (फूल) किए गए। जलसे में नात पेश की गई। सुबह नमाज के बाद मदरसा जामिया रब्बानिया में कुरान ख्वानी हुई। इसी के बाद दरबारे कादरी मजहरी (दरगाह) में जलसा हुआ। अकीदतमंदों ने मजार पर फूल चढ़ाए।
मौलाना सैय्यद अनवर रब्बानी ने जलसे की सदारत की। मौलाना महशर रब्बानी (मुंबई), मौलाना सैय्यद नैय्यर रब्बानी (बिल्हौर), मौलाना सैय्यद राशिद रब्बानी (मैनेजर, जामिया रब्बानिया) सहित सैय्यद गुफरान रब्बानी, सैय्यद अकबर रब्बानी ने अपने खिताब (संबोधन) में मरहूम बड़े हजरत के बारे में बताया कि उन्होंने 55 साल पहले मदरसा दारुल उलूम रब्बानिया कायम किया था।
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इस मदरसे से सैकड़ों आलिम, हाफिज, कारी हुए हैं। शाम को हल्का-ए-कादरिया में लंगर हुआ। इसका एहतेमाम मौलाना सैय्यद आबिद रब्बानी (अमीर शोबए तब्लीग) ने किया। फातेहा के मौके पर सैय्यद जाहिद मियां, सैय्यद अजहर रब्बानी, असगर रब्बानी, शहबाज रब्बानी, महवर रब्बानी, अंबर रब्बानी, सफदर रब्बानी, जौहर रब्बानी आदि ने नातिया कलाम पेश किए। गौहर रब्बानी, सरवर रब्बानी, वाजिद रब्बानी समेत सपा नेता शमीम बांदवी, हाजी शकील अली, हाजी गुलाम मुस्तफा, फैजान रब्बानी, रिजवान रब्बानी आदि शामिल रहे।
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