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तीसरी लहर की आशंका, अस्पतालों में इंतजाम नहीं

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Akhilesh Yadav is the enemy of the backward: Maurya - फोटो : BANDA
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बांदा। कोरोना के नए स्वरूप ओमिक्रॉन के सामने आने के बाद तीसरी लहर की आशंका प्रबल हो गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक तीसरी लहर बच्चों पर ज्यादा भारी पड़ सकती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर इंतजाम नाकाफी हैं। मंडल मुख्यालय में मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग के तीन वरिष्ठ डाक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है। यहां बच्चों का इलाज एकमात्र सीनियर रेजीडेंट डॉ. आकाश खरे के भरोसे है। अगले महीने वे भी हायर एजूकेशन काउंसलिंग के बाद चले जाएंगे। तब सिर्फ चार जूनियर रेजीडेंट ही बचेंगे। अगले महीनों में कोरोना का कहर बढ़ा तो बच्चों का इलाज मुश्किल होगा।
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मेडिकल कालेज में बच्चों के लिए 100 बेड का पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट (पीकू) वार्ड बनाया गया है। यहां उपकरण पर्याप्त हैं, लेकिन डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टाफ नहीं हैं। पिछले वर्ष बाल रोग विभाग में आचार्य, सह आचार्य और सीनियर व जूनियर रेजीडेंट सहित आठ डाक्टर थे। कोरोना के मद्देनजर इनकी संख्या और बढ़नी चाहिए थी। मगर अब एक सीनियर और चार जूनियर रेजीडेंट ही बचे हैं। मेडिकल कालेज प्रशासन के मुताबिक बाल रोग विभाग में संविदा में सहायक आचार्य पद पर रहीं डॉ. अनीता अग्रहरि ने आठ दिसंबर को इस्तीफा दे दिया। इसी तरह आचार्य पद पर तैनात डॉ. मनोज और सहायक आचार्य डॉ. मुकेश बाबू ने भी इस्तीफा दे दिया है। दोनों आगरा के हैं। मौजूदा में सीनियर रेजीडेंट डॉ. आकाश खरे हैं।
नियुक्ति के लिए महानिदेशक को भेजा पत्र
कोरोना की तीसरी लहर की तैयारियों के साथ बाल रोग विभाग में विशेषज्ञों की नियुक्ति के लिए महानिदेशक (चिकित्सा एवं शिक्षा) को पत्र भेजा गया है। दो और डॉक्टरों के इस्तीफा नोटिस देने के बाद महानिदेशक को अवगत कराया गया है। दिशा-निर्देश जारी होते ही शीघ्र संविदा पर नियुक्ति की जाएगी।
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- डॉ. मुकेश कुमार यादव, प्राचार्य, रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज
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