बांदा। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत मतदाता सूची के सत्यापन के दौरान नो मैपिंग श्रेणी में चिह्नित किए गए मतदाताओं को अपनी पहचान साबित करने के लिए अधिकारियों की चौखट के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। जिला निर्वाचन विभाग द्वारा जारी नोटिस के बाद ऐसे वोटरों की भीड़ विभिन्न नामित अधिकारियों के यहां देखी जा रही है। पहचान के लिए मांगे गए साक्ष्य प्रस्तुत करने के बाद 150 से अधिक आपत्तियों का निस्तारण किया गया है लेकिन कई वोटर आवश्यक दस्तावेज न जुटा पाने के कारण परेशान हैं।
निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार वर्ष 2025 की मतदाता सूची के आधार पर जिले की चारों विधानसभा सीटों (बांदा, बबेरू, तिंदवारी, नरैनी) पर कुल 13,49,521 मतदाता हैं। इसी क्रम में, वर्ष 2003 की मतदाता सूची के आधार पर 11,74,109 मतदाताओं का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के तहत सत्यापन कराया गया। इस सत्यापन प्रक्रिया में 1,75,412 मतदाता अनुपस्थित, स्थानांतरित या मृत पाए गए। नो मैपिंग की समस्या के कारण इन सभी मतदाताओं को अपनी पहचान स्थापित करने के लिए निर्वाचन विभाग ने नोटिस जारी किए हैं।
पहचान की पुष्टि के लिए निर्वाचन विभाग ने जिला, तहसील और ब्लाक स्तर के अधिकारियों को निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एईआरओ) के रूप में नामित किया है। बृहस्पतिवार को इन अधिकारियों के कार्यालयों में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता पहुंचे, जिन्हें अपनी नागरिकता और पते का प्रमाण देना था। कई मतदाताओं ने आधार कार्ड और सामान्य निवास प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज प्रस्तुत किए लेकिन कुछ के लिए यह प्रक्रिया आसान नहीं रही।
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साक्ष्य की कमी से परेशानी खासकर, आधार कार्ड और सामान्य निवास प्रमाणपत्र को साक्ष्य के रूप में स्वीकार न किए जाने से है। कई वोटर अपने माता-पिता के निवासी होने का प्रमाण भी नहीं दे पाए, जिससे उनकी आपत्तियों का तत्काल निस्तारण नहीं हो सका। अधिकारियों ने ऐसे 41 मतदाताओं को एक सप्ताह के भीतर आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है, अन्यथा उनकी मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
एएसडी वोटरों को देना होगा यह प्रमाण
एएसडी वोटरों को अपनी पहचान साबित करने के लिए चार प्रमाण देने होंगे। आयोग ने प्रमाण के 13 विकल्प सुझाए हैं। इनमें सरकार व सार्वजनिक उपक्रम, बैंक, डाकघर, एलआईसी का पहचान पत्र व पेंशन दस्तावेज, जन्म प्रमाणपत्र, यूपी बोर्ड या विश्व विद्यालय द्वारा जारी शैक्षिक प्रमाणपत्र, स्थायी निवास प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, परिवार रजिस्टर, मकान का रजिस्ट्ररी।
केस-1.
मढ़िया नाका के भोला का कहना है कि पूरे परिवार का नाम मतदाता सूची में नहीं है। हाईस्कूल का प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र, पेंशन दस्तावेज उपलब्ध करा दिया है लेकिन माता-पिता का नाम 2003 की मतदाता सूची में न होने से माता-पिता के निवासी होने का साक्ष्य मांग रहे हैं।
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केस-2
खिन्नी नाका के मैकू का कहना है कि 2003 की मतदाता सूची में पूरे परिवार का नाम नहीं है। पता नहीं कैसे कट गया। नोटिस के बाद परिवार सहित पहचान साबित करने के लिए साक्ष्य के साथ यहां पूर्ति निरीक्षक कार्यालय में दो घंटे से बैठे हुए हैं। चार प्रमाण देने में दिक्कत आ रही है।
2003 की मतदाता सूची में जिनका नाम नहीं है उन्हें अपना व माता-पिता के निवासी होने सहित जन्म का प्रमाण देना होगा। तभी उनका नाम मतदाता सूची में शामिल होगा। जिनके नाम हैं उन्हें अपना डिटेल व माता पिता के वोटर कार्ड का ईपीएफ नंबर देना होगा।
- विकास पांडेय, तहसीलदार
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